मिजोरम में अब शराब के लिए चाहिए 'रेड कार्ड', चुकानी होगी मोटी फीस और पूरी करनी होगी यह शर्त राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
ड्राई स्टेट मिजोरम में नए संशोधित कानून के तहत मेडिकल आधार पर शराब रखने और सीमित सेवन के लिए 'रेड कार्ड' अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके एक साल के परमिट की फीस 5000 रुपये तय की गई है।

शराबबंदी वाले राज्य मिजोरम में अब शराब पीने को लेकर सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू कर दी है। राज्य सरकार ने ‘मिजोरम लिकर (प्रोहिबिशन) अमेंडमेंट एक्ट 2025’ के तहत ऐसे लोगों को ‘रेड कार्ड’ यानी विशेष परमिट देने का निर्णय लिया है, जिन्हें डॉक्टर की सलाह या मेडिकल ग्राउंड्स पर शराब की आवश्यकता मानी जाएगी। यानी अब बिना इस कार्ड और तय फीस के शराब का सेवन संभव नहीं होगा।

किन लोगों को मिलेगा रेड कार्ड

एक्साइज और नारकोटिक्स विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह रेड कार्ड सेक्शन 45B(1) के तहत उन्हीं आवेदकों को दिया जाएगा जिनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी हो कि डॉक्टर की सलाह पर उन्हें शराब रखने और सीमित मात्रा में सेवन करने का मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी हो। साफ है कि यह कार्ड आम शौकिया तौर पर पीने वालों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ मेडिकल कारणों से शराब की जरूरत बताने वालों के लिए बनाया गया है।

कहां से मिलेगा आवेदन फॉर्म

रेड कार्ड के लिए आवेदन फॉर्म पूरे मिजोरम के सभी जिलों में मौजूद एक्साइज और नारकोटिक्स कार्यालयों से प्राप्त किए जा सकेंगे। आवेदक को आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज और मेडिकल आधार पेश करना होगा, जिसके बाद विभाग पूरी जांच करने के उपरांत परमिट जारी करेगा।

एक साल की वैधता, 5000 रुपये फीस

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह रेड कार्ड परमिट 1 साल के लिए मान्य रहेगा और इसके बदले आवेदक को 5000 रुपये की फीस जमा करनी होगी। इसका अर्थ है कि मेडिकल आधार पर शराब की इजाजत भी सस्ती नहीं रहेगी और इसके लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी।

नए कानून में और कौन-कौन से प्रावधान

पिछले साल मार्च में मिजोरम विधानसभा ने कड़े विरोध के बीच 2019 के मिजोरम लिकर (प्रोहिबिशन) एक्ट में संशोधन किया था। इस संशोधन के बाद कई नई व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं।

  • विशिष्ट हस्तियों और देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष शराब परमिट की व्यवस्था की गई है।
  • राज्य में स्थानीय कृषि और बागवानी उत्पादों से तैयार वाइन और फ्रूट बीयर के निर्माण, बिक्री और सप्लाई की भी अनुमति दी गई है।

इन उत्पादों में केवल स्थानीय स्तर पर उगाए जाने वाले अदरक, केला, ड्रैगन फ्रूट, पैशन फ्रूट, अनानास, आंवला, अमरूद, करम्बोला (स्टारफ्रूट), गन्ना, कटहल, तरबूज और हनीड्यू मेलन जैसे फल और फसलें शामिल होंगी। यानी बाहरी या रासायनिक मिश्रित शराब के बजाय स्थानीय उत्पादों पर आधारित वाइन और फ्रूट बीयर को बढ़ावा दिया जाएगा।

पूर्ण शराबबंदी से नियंत्रित व्यवस्था की ओर

मिजोरम लिकर (प्रोहिबिशन) एक्ट 2019 पिछली मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) सरकार के कार्यकाल में लागू हुआ था, जिसके तहत शराब या किसी भी तरह के अल्कोहल से जुड़े पदार्थों के निर्माण, बिक्री, खपत और आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। अब संशोधित कानून के जरिए सरकार ने इस पूर्ण प्रतिबंध को थोड़ा नरम करते हुए एक नियंत्रित ढांचा अपनाया है।

  • मेडिकल आधार पर ‘रेड कार्ड’ के जरिए सीमित और नियंत्रित शराब सेवन की अनुमति।
  • खास वर्गों और पर्यटकों के लिए विशेष परमिट की व्यवस्था।
  • स्थानीय फलों से बनी वाइन और फ्रूट बीयर के उत्पादन की इजाजत।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!