हर्ष फायरिंग में डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत: भाजपा विधायक राजू सिंह को आज सुनाई जाएगी सजा बिहार 4 दिन पहले 5
नए साल की पार्टी में हुई हर्ष फायरिंग से डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत के मामले में बिहार के साहिबगंज विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी ठहराया जा चुका है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज सजा के बिंदु पर बहस के बाद फैसला सुनाएगी।

रसूख के नशे में की गई एक हर्ष फायरिंग ने एक खुशहाल परिवार को ताउम्र का जख्म दे दिया। करीब साढ़े सात साल पुराने इस चर्चित मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट अब अपने अहम फैसले की दहलीज पर है। अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहिबगंज विधानसभा सीट से विधायक राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया है, और आज (9 जून) को उनकी सजा का ऐलान होना है।

डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल हर्ष फायरिंग मामले में दोषसिद्धि के बाद अब सजा के बिंदु पर बहस होगी, जिसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि विधायक को कितनी सजा भुगतनी होगी। बीते 6 जून को अदालत उन्हें गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दे चुकी है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने दोषसिद्धि के तुरंत बाद विधायक को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। अब सबकी निगाहें आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

2018 के आखिरी दिन की वो दुखद रात

यह पूरी घटना 31 दिसंबर 2018 की रात की है। उस समय दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित बसंत कुंज इलाके के एक आलीशान फार्महाउस में नए साल के स्वागत का जश्न चल रहा था। पार्टी में भारी भीड़ जुटी थी और लोग नाच-गाने में मगन थे। इसी बीच आरोपी विधायक राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल निकाली और हवा में गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

दुर्भाग्यवश उनकी पिस्तौल से निकली एक गोली वहां मौजूद 45 वर्षीय महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता के सिर में जा लगी। गोली लगते ही डॉक्टर अर्चना खून से लथपथ होकर गिर पड़ीं। उन्हें आनन-फानन में पास के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान 3 जनवरी 2019 को उन्होंने दम तोड़ दिया। इस वारदात के बाद डॉक्टर अर्चना के पति की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने फतेहपुर बेरी थाने में मामला दर्ज किया था।

लापरवाही को कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

बीते 6 जून को अदालत ने गवाहों के बयान और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर राजू सिंह को दोषी ठहराया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले पर बेहद सख्त टिप्पणी भी की थी। न्यायाधीश ने कहा कि नए साल की पार्टी जैसे भीड़भाड़ वाले माहौल और डांस फ्लोर पर हथियार से गोली चलाना यह साफ दर्शाता है कि आरोपी को भलीभांति पता था कि उसके इस कृत्य से किसी की जान जा सकती है।

अदालत ने इस दलील को पूरी तरह नकार दिया कि यह महज एक हादसा था। कोर्ट ने इस घटना को गंभीर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा।

तीन अन्य आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी

इस मामले में पुलिस ने विधायक राजू कुमार सिंह के अलावा उनकी पत्नी एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य रेणु सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को भी आरोपी बनाया था। इन तीनों पर आरोप था कि घटना के बाद इन्होंने फार्महाउस पर पड़े खून के धब्बों को साफ कर सबूत मिटाने की कोशिश की।

हालांकि लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि इन तीनों के खिलाफ सबूत मिटाने के पुख्ता प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इसके बाद कोर्ट ने राजू सिंह की पत्नी समेत तीनों सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

दांव पर विधायक राजू सिंह की सदस्यता

कानूनी जानकारों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-2 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दोषी पाए जाने पर अपराधी को अधिकतम 7 साल तक की जेल या जुर्माना अथवा दोनों की सजा हो सकती है। यही वजह है कि राजू सिंह के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से आज का दिन बेहद अहम है।

नियमों के अनुसार यदि कोर्ट उन्हें 2 वर्ष या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाती है, तो उनकी साहिबगंज विधानसभा सीट की सदस्यता तत्काल रद्द हो जाएगी। गौरतलब है कि वह चार बार के विधायक और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में अगर सजा 2 वर्ष से अधिक होती है तो भाजपा को भी बड़ा झटका लगेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!