बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
जैविक खेती की ओर बढ़ता रुझान
आज के दौर में रसायनों के उपयोग से उपजी फसलों के दुष्प्रभावों को देखते हुए किसान जागरूक हो रहे हैं। खेती की पैदावार बढ़ाने और फसलों को सुरक्षा देने के नाम पर रसायनों का अंधाधुंध इस्तेमाल अब चिंता का विषय बन गया है। यही कारण है कि अब आम लोगों के साथ-साथ किसान भी जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार भी इस दिशा में कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।
रणजीत का सफल मॉडल
रणजीत जैसे प्रगतिशील किसान इस क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरे हैं। वे पूरी तरह से जैविक पद्धति का पालन करते हुए ड्रैगन फ्रूट, पपीता और केला जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। रसायनों से दूर रहकर खेती करने के कारण न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर है, बल्कि उन्हें बाजार में अच्छी कीमत भी मिल रही है। यह खेती उन्हें पारंपरिक 9 से 5 की नौकरी से अधिक आर्थिक स्वतंत्रता दे रही है, जिससे वे प्रति माह 25 से 30 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
निशुल्क प्रशिक्षण का संदेश
रणजीत न केवल खुद जैविक खेती कर रहे हैं, बल्कि वे दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेती में लागत कम करके और जैविक खादों का उपयोग करके मुनाफा कमाना संभव है। वे खेती के इच्छुक लोगों को जैविक विधि से जुड़ी तकनीक सिखाने के लिए निशुल्क ट्रेनिंग भी देते हैं ताकि अधिक से अधिक युवा खेती को सम्मानजनक और लाभदायक करियर के रूप में देख सकें।
जैविक खेती के फायदे
- फसलों और मिट्टी की सेहत में सुधार।
- रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी।
- बाजार में जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग और अच्छी कीमत।
- पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धति।
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