उपनाम: जैविक खाद
20 एकड़ खेती में जीरो खर्च, खाद-कीटनाशक का झंझट खत्म: किसान का यह अनोखा फार्मूला कर रहा कमाल
रोहतास जिले के एक प्रगतिशील किसान ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बंद कर प्राकृतिक खेती का मॉडल अपनाया है, जिससे न केवल उनकी लागत शून्य हो गई है बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ गया है।
प्याज के छिलकों को न फेंकें कचरे में, घर पर ही मुफ्त में तैयार करें पौधों के लिए खाद
रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले प्याज के छिलके पौधों के लिए बेहतरीन खाद का काम कर सकते हैं। जानिए कैसे आप कचरे में फेंकने वाले इन छिलकों से पौधों को पोषण दे सकते हैं।
गुड़हल में नहीं आ रहे फूल, नवरात्रि से पहले इन आसान टिप्स से आपका पौधा भी हो जाएगा फूलों से लबालब
नवरात्रि के दौरान गुड़हल के फूलों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन कई बार देखभाल में कमी के कारण पौधा हरा-भरा होने के बावजूद फूल नहीं दे पाता। पलामू के एक विशेषज्ञ किसान के बताए ये उपाय अपनाकर आप अपने पौधे पर ढेरों फूल पा सकते हैं।
खेती की लागत घटाने और मिट्टी उपजाऊ बनाने का तरीका: फसल अवशेषों को जलाने के बजाय ऐसे करें प्रबंधन
कटाई के बाद खेत में बचे फसल के कचरे को आग के हवाले करना न केवल प्रदूषण फैलाता है बल्कि जमीन की उर्वरक क्षमता भी घटाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसान इन अवशेषों का उपयोग मल्चिंग, खाद निर्माण और पशु आहार के रूप में करके दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
खेती की लागत घटाने का अचूक नुस्खा: छपरा के इस किसान से सीखें 100 लीटर पानी और 1 किलो गुड़ से वेस्ट डीकंपोजर घोल बनाने का तरीका
बिहार के सारण जिले के प्रगतिशील किसान विष्णु सिंह वेस्ट डीकंपोजर की मदद से बेहद कम लागत में बेहतरीन जैविक घोल तैयार कर रहे हैं, जिससे रासायनिक खादों पर उनकी निर्भरता समाप्त हो गई है।
छत पर गमले में उगाया है नींबू का पौधा? मानसून में इस तरह करें देखभाल, लगेंगे ढेरों फल
घर की छत पर गमले में नींबू का पौधा लगाने और बारिश के मौसम में उसकी सही देखभाल करने के आसान और बेहद उपयोगी तरीके।
6 साल से घर की छत पर फल-फूल रहा किचन गार्डन, सब्जियों के छिलके और चावल की भूसी से तैयार होती है जादुई खाद
मेदिनीनगर की अनु दुबे ने घर के किचन वेस्ट से खाद बनाने की एक अनोखी तकनीक विकसित की है। पिछले 6 वर्षों से वे अपनी छत पर ही इसी जैविक खाद के दम पर ताजी सब्जियां उगा रही हैं।
जैविक खेती में NPK की कमी को ऐसे करें पूरा, मदर कल्चर से तैयार होगा पोषक तत्वों का घोल
जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए अब मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की कमी दूर करना आसान हो गया है। बिलासपुर के विशेषज्ञ रोहन कुमार वर्मा ने घर पर ही मदर कल्चर से खाद का घोल तैयार करने की सरल विधि साझा की है।
खेती की उर्वरक शक्ति बढ़ाने के लिए गोबर का ऐसे करें सही उपयोग, कम लागत में तैयार होगी बेहतरीन जैविक खाद
किसान भाई गोबर को खुले में बर्बाद न करें, बल्कि उसे सही तरीके से खाद बनाकर अपने खेतों में इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसल को भरपूर पोषण मिलता है।
तोरई की उन्नत खेती: बंपर पैदावार और दोगुने उत्पादन के लिए अपनाएं मचान विधि और संतुलित पोषण का फॉर्मूला
तोरई की खेती से बंपर पैदावार पाने के लिए सही मिट्टी, जैविक खाद, मचान तकनीक और समय पर रोग नियंत्रण बेहद जरूरी है, जिससे किसानों की कमाई दोगुनी हो सकती है।
पलामू की महिला किसान का कमाल: बैंगन की जड़ पर टमाटर उगाकर कर रही हैं बंपर कमाई
झारखंड के पलामू जिले की एक महिला किसान ने आधुनिक ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाकर टमाटर की खेती में नया प्रयोग किया है, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक होने की संभावना है।
पलामू की रीना देवी ने पेश की मिसाल, खेती छोड़ जैविक खाद के बिजनेस से बनीं आत्मनिर्भर
झारखंड के पलामू जिले की निवासी रीना देवी ने वर्मी कंपोस्ट और जैविक उत्पादों के निर्माण को अपना रोजगार बनाकर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
गार्डनिंग टिप्स: सब्जी के छिलकों को कचरा समझकर न फेंकें, घर पर मुफ्त में ऐसे बनाएं ऑर्गेनिक खाद, खिल उठेंगे आपके पौधे
घर की रसोई से निकलने वाले सब्जी और फलों के छिलकों को फेंकने के बजाय आप उनसे पौधों के लिए बेहद पौष्टिक जैविक खाद तैयार कर सकते हैं। जानिए घर पर सॉलिड और लिक्विड कंपोस्ट बनाने का सबसे आसान तरीका।
गीले कचरे का प्रबंधन: घर से शुरू करें खुद का बिजनेस और कमाएं मुनाफा
घर से निकलने वाला गीला कचरा किसी बेकार वस्तु से कम नहीं है, बल्कि यह एक बेहतरीन कच्चा माल है जिससे खाद और बायोगैस जैसी उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं।
बारिश में नन्ही पौध को बचाएगा किसान का देसी जुगाड़, कम लागत में तैयार की अनोखी नर्सरी
रामपुर के एक प्रगतिशील किसान ने बारिश के दौरान मिर्च और गोभी की नाजुक पौध को सुरक्षित रखने के लिए मच्छरदानी और बांस का उपयोग कर कम लागत वाला नर्सरी हाउस बनाया है। पिछले 5 वर्षों से अपनाया जा रहा यह तरीका अब कई किसानों के लिए मिसाल बन गया है।