किचन गार्डन लगाने का सबसे सही वक्त जून! ये सब्जियां बोएं और मानसून में थाली रखें हरी-भरी भारत एक घंटा पहले 3
मानसून में सब्जियों की बढ़ती कीमतों से राहत पानी है तो अभी से किचन गार्डन की तैयारी शुरू कर दें। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार जून में लगाई गई लौकी, नेनुआ, भिंडी और मिर्च जैसी फसलें पूरी बारिश आपकी थाली को हरा-भरा रख सकती हैं।

बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली और ठंडक तो लाता है, लेकिन यही मौसम आम लोगों की जेब पर भारी भी पड़ता है। लगातार बारिश के चलते कई बार खेतों में सब्जियों की फसल खराब हो जाती है। कहीं जलजमाव हो जाता है तो कहीं पौधों में गलन की समस्या शुरू हो जाती है। इसका सीधा असर बाजार पर पड़ता है और सब्जियों के दाम अचानक चढ़ने लगते हैं, जिससे घर की रसोई का बजट बिगड़ जाता है।

हालांकि थोड़ी सी योजना बनाकर अभी से तैयारी कर ली जाए, तो मानसून के दौरान महंगी सब्जियां खरीदने की जरूरत काफी हद तक घट सकती है।

क्या कहते हैं देवघर के कृषि विशेषज्ञ

देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा का कहना है कि किचन गार्डन तैयार करने के लिए जून का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय लगाई गई कई सब्जियां बारिश के मौसम में अच्छी पैदावार देती हैं।

उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में बाजार में सब्जियों की कमी होना आम बात है। ज्यादा बारिश की वजह से कई किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है, जिससे उत्पादन घटता है और कीमतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में अगर घर के आंगन, छत या किसी खाली जगह पर छोटा सा किचन गार्डन बना लिया जाए, तो परिवार को ताजी सब्जियां आसानी से मिल सकती हैं।

जून में लगाएं ये सब्जियां

कृषि विशेषज्ञ के अनुसार लौकी, नेनुआ यानी तुरई, भिंडी, बरबटी, सेम, मिर्च और धनिया जैसी सब्जियां मानसून के मौसम में अच्छी बढ़वार करती हैं। इन्हें उगाने के लिए बहुत अधिक जगह की भी जरूरत नहीं पड़ती। छोटे गमलों, ग्रो बैग या घर के किसी खाली हिस्से में भी इनकी खेती की जा सकती है।

खास बात यह है कि इन सब्जियों की देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है। समय-समय पर पानी देने, जैविक खाद डालने और पौधों की निगरानी रखने से अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है।

कम खर्च में थाली में भरपूर सब्जी

अंबिका कुशवाहा बताते हैं कि किचन गार्डन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि परिवार को ताजी और रसायन मुक्त सब्जियां मिलती हैं। बाजार से खरीदी गई सब्जियों के मुकाबले घर में उगाई गई सब्जियां ज्यादा सुरक्षित और पौष्टिक होती हैं। इसके साथ ही सब्जियों पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो जाता है।

कई बार एक बार लगाए गए पौधे लंबे समय तक उत्पादन देते रहते हैं, जिससे लगातार सब्जियां मिलती रहती हैं।

बिना खेत के भी उगा सकते हैं सब्जियां

उनका कहना है कि जिन लोगों के पास खेत नहीं है, वे भी आसानी से किचन गार्डन शुरू कर सकते हैं। छत, बालकनी या घर के सामने थोड़ी सी जगह भी इसके लिए पर्याप्त है। अगर अभी जून में बीज या पौधे लगा दिए जाएं, तो बारिश के मौसम में घर की थाली हरी-भरी बनी रहेगी।

इससे न सिर्फ ताजी सब्जियां मिलेंगी, बल्कि बढ़ती महंगाई का असर भी काफी हद तक कम होगा। इसलिए मानसून आने से पहले किचन गार्डन की तैयारी शुरू कर देना एक समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!