राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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कर्नाटक कांग्रेस इन दिनों भीतरी खींचतान से जूझ रही है। राज्य की कमान संभालते ही नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पहला और बड़ा झटका तब लगा, जब उनकी ही कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने पद से इस्तीफा दे दिया। रेड्डी ने मीडिया के सामने आकर खुद इस्तीफे का ऐलान किया, जिसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद और फूट के साफ संकेत मिलने लगे हैं।
कौन हैं रामलिंगा रेड्डी
रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ और जमीनी नेता माने जाते हैं। डीके शिवकुमार सरकार में उन्हें परिवहन और मुजरा (धार्मिक एंडोमेंट) मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे रेड्डी बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट विधानसभा क्षेत्र से 8 बार विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा वे कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी (KPCC) के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे अहम पद की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इस्तीफे की असल वजह
रेड्डी ने कैबिनेट में अपनी पसंद का पद न मिलने से नाराज होकर इस्तीफा दिया है। कर्नाटक की नई सरकार ने महज दो दिन पहले ही शपथ ली है, ऐसे में उनका यह फैसला सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
छात्र राजनीति से हुई शुरुआत
रेड्डी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1973 में छात्र जीवन से की थी। सरकारी विज्ञान कॉलेज में वे छात्र संघ के सचिव बने और NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) से जुड़े।
- 1983-88 में बेंगलुरु महानगर पालिका के कॉर्पोरेटर चुने गए।
- 1985-90 के दौरान जयनगर ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
- 1989 में पहली बार जयनगर से विधायक बने और तब से लगातार 8 बार जीत दर्ज की (4 बार जयनगर और 4 बार बीटीएम लेआउट से)।
कब-कब बने मंत्री
रामलिंगा रेड्डी 1973 से राजनीति में सक्रिय हैं और उनके पास 50 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव है। वे अलग-अलग सरकारों में 5 बार मंत्री रह चुके हैं।
- प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री (2004-06)
- परिवहन मंत्री (2013-17)
- गृह मंत्री (2017-18)
- 2023 से सिद्धारमैया सरकार में फिर परिवहन और मुजरा मंत्री
परिवार और निजी जीवन
रामलिंगा रेड्डी का जन्म 12 जून 1953 को बेंगलुरु में हुआ था। जून 2026 तक उनकी उम्र 72-73 साल है। उनके पिता बी वेंकटरेड्डी पूर्व कॉर्पोरेटर रहे और मां का नाम पिल्लम्मा था। उनकी पत्नी का नाम चामुंडेश्वरी रेड्डी है। उनके एक बेटे श्रीराज रेड्डी और एक बेटी सौम्या रेड्डी हैं, जो खुद कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक रह चुकी हैं।
गांधी परिवार से नजदीकी
रेड्डी कांग्रेस के वफादार नेताओं में गिने जाते हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी से उनके अच्छे रिश्ते हैं, वहीं उन्हें सिद्धारमैया के करीबी नेता के तौर पर भी देखा जाता है। साल 2019 में जब उनके इस्तीफे की अटकलें तेज हुई थीं, तब सोनिया गांधी ने उनकी बेटी सौम्या रेड्डी से मुलाकात कर उन्हें पार्टी में बनाए रखने की कोशिश की थी।
शिवकुमार से क्यों थी नाराजगी
रामलिंगा रेड्डी और डीके शिवकुमार के बीच मतभेद की खबरें पहले से सामने आती रही हैं। खासकर बेंगलुरु विकास से जुड़े पोर्टफोलियो बंटवारे को लेकर दोनों नेताओं की राय अलग-अलग रही है। रेड्डी ने शिवकुमार की कुछ टिप्पणियों का भी खुलकर विरोध किया था। हालांकि उनका मौजूदा इस्तीफा मुख्य रूप से मनचाहा पद न मिलने के चलते आया है।
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