नीरज डांगी कौन हैं? राजस्थान राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर सौंपी उम्मीदवारी राजस्थान एक घंटा पहले 2
राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने मौजूदा सांसद और अशोक गहलोत के करीबी नेता नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। यूथ कांग्रेस से सियासत में आए डांगी दो बार बेहद कम अंतर से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।

राजस्थान से होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर अपने वरिष्ठ और भरोसेमंद नेता नीरज डांगी पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। राज्य की तीन राज्यसभा सीटों पर हो रहे इस चुनाव में संख्या बल के आधार पर कांग्रेस की एक सीट पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। संगठन के प्रति डांगी की निष्ठा और उनके कामकाज को देखते हुए आलाकमान ने उन्हें दोबारा उच्च सदन भेजने का निर्णय लिया है।

राजस्थान कांग्रेस में नीरज डांगी की पहचान एक समर्पित, अनुशासित और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में होती है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का सबसे करीबी और वफादार सहयोगी माना जाता है। लंबे समय से वे कांग्रेस संगठन में अलग-अलग पदों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। दलित और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अधिकारों की आवाज उठाने तथा उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए उनकी विशिष्ट पहचान रही है।

राजनीतिक विरासत और यूथ कांग्रेस से आगाज

4 नवंबर 1970 को जयपुर में जन्मे नीरज डांगी एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता स्वर्गीय दिनेश राय डांगी राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री रह चुके थे, जिन्होंने दलित समाज के सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया था। पिता से प्रेरणा लेकर नीरज डांगी ने छात्र जीवन के दौरान ही सार्वजनिक जीवन में कदम रखा।

शिक्षा की दृष्टि से उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर्नाटक (सुरथकल) से सिविल इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री डिस्टिंक्शन के साथ हासिल की। उच्च शिक्षित होने के बावजूद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और साल 2002 में राजस्थान यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। इसके बाद 2004 से 2009 तक वे संगठन के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे।

हार के बाद भी पार्टी पर अडिग भरोसा

नीरज डांगी का चुनावी सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कांग्रेस ने उन्हें 2003 में देसूरी से तथा इसके बाद 2008 और 2018 में रेवदर (SC) विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि स्थानीय गुटबाजी और बेहद मामूली वोटों के अंतर के कारण इन चुनावों में उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी। लगातार विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा और पूरी निष्ठा से संगठन को मजबूत करने में जुटे रहे।

इसी अटूट वफादारी का इनाम उन्हें साल 2020 में मिला, जब पार्टी ने उन्हें पहली बार राज्यसभा भेजा। अब 2026 में उनकी इसी निष्ठा को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने उन्हें दोबारा राज्यसभा का टिकट सौंपा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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