स्लीमनाबाद में आकार ले रही देश की सबसे लंबी वाटर टनल, चार जिलों को मिलेगा नर्मदा का जल — अब कितना काम शेष? मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 53
कटनी के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी जल सुरंग अपने अंतिम चरण में है और इसमें केवल 108 मीटर खुदाई बाकी है। जून 2026 के अंत तक काम पूरा होने पर बरगी बांध का पानी रीवा, सतना, मैहर और पन्ना तक पहुंचेगा।

विंध्य अंचल तक नर्मदा का पानी ले जाने वाली बहुप्रतीक्षित परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर आ पहुंची है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में निर्माणाधीन देश की सबसे बड़ी जल सुरंग (वाटर टनल) में फिलहाल मात्र 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है। अधिकारियों का अनुमान है कि जून 2026 के अंत तक यह शेष कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

काम पूरा होते ही बरगी बांध का पानी पहली बार रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों की लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक पहुंच सकेगा। इसके साथ-साथ कटनी जिले को भी पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी।

17 साल पुरानी परियोजना और तकनीकी अड़चनें

करीब 11.95 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण कार्य वर्ष 2008 में आरंभ हुआ था। लगभग 1500 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को पूरा करने में इंजीनियरों को कई बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

खुदाई के दौरान संगमरमर, चूना पत्थर, मिट्टी और विशाल पत्थरों की परतें सामने आईं, जिनके कारण कई बार मशीनों के कटर टूट गए। इन कटरों को बदलने में करीब 67 करोड़ रुपए खर्च हुए। वर्ष 2013 में मीथेन गैस के रिसाव के चलते चार महीने तक काम ठप रखना पड़ा। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण एक महंगी अमेरिकी मशीन भी बेकार हो गई।

कैसे चल रहा है निर्माण?

इस समय सुरंग के आखिरी हिस्से में जर्मन टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) अंतिम खुदाई कर रही है। सुरंग का व्यास 10.14 मीटर है, जो करीब तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। भीतर तापमान और नमी बेहद अधिक रहने के कारण कर्मचारी लगातार तीन घंटे से ज्यादा काम नहीं कर पाते।

सुरंग के अंदर लगातार भूजल का बहाव बना हुआ है और हर मिनट करीब 32 हजार लीटर पानी बाहर निकाला जा रहा है। इसके लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन निरंतर सक्रिय हैं। सुरक्षा के लिहाज से 1420 किलो वजनी मजबूत सीमेंट रिंग्स लगाई गई हैं, जिनकी आयु 100 साल से अधिक बताई जा रही है।

विंध्य की खेती को मिलेगा बड़ा सहारा

परियोजना के पूरा होने पर विंध्य क्षेत्र की खेती को बड़ा लाभ मिलेगा और लाखों किसानों की सिंचाई से जुड़ी परेशानी दूर होगी। कई तकनीकी चुनौतियों के बावजूद यह परियोजना अब अपने पूरा होने के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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