राजस्थान
एक घंटा पहले
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विचारों
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव और राज्य में बीते वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अपनी खामोशी तोड़ी है। ऊपरी तौर पर देखें तो उनका यह बयान महज अतीत को लेकर दी गई सफाई जैसा लग सकता है, लेकिन इसे राजस्थान कांग्रेस की मौजूदा सियासत और संगठन के भीतर चल रही संभावित सुगबुगाहट के साथ जोड़कर पढ़ा जाए तो इसके कई राजनीतिक मायने सामने आते हैं।
आखिर अभी क्यों उठा यह मुद्दा
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस समय कांग्रेस के भीतर हाईकमान पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है, ठीक उसी दौर में अशोक गहलोत को अचानक चार साल पुरानी घटनाएं याद क्यों आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में इस टाइमिंग को लेकर ही तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
बयान के पीछे के सियासी संकेत
गहलोत का यह बयान सिर्फ बीते दिनों की सफाई भर नहीं माना जा रहा। इसे राज्य कांग्रेस के मौजूदा समीकरणों और पार्टी के अंदर पनप रही संभावित हलचल की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है, जिससे यह कयास तेज हो गए हैं कि 'जादूगर' के नाम से मशहूर गहलोत किसी बड़ी राजनीतिक चाल की तैयारी में तो नहीं हैं।
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