नौतपा के अंतिम चार दिन बरसे बादल, अब कैसा रहेगा मौसम का मिजाज? जानिए ज्योतिषी की राय उत्तराखंड 50 मिनट पहले 2
इस साल नौतपा के आखिरी चार दिनों में उत्तराखंड समेत देश के कई हिस्सों में बारिश हुई, जिसे ज्योतिष में मौसम के बदलते चक्र का संकेत माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में मानसून सामान्य से बेहतर, पर बीच-बीच में अनिश्चित रह सकता है।

गर्मी के मौसम में नौतपा का अपना खास महत्व माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके बाद के नौ दिनों की अवधि को नौतपा कहा जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में आसमान से तेज धूप बरसनी चाहिए और प्रचंड गर्मी पड़नी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अगर इस दौरान तापमान ऊंचा रहे और धरती अच्छी तरह तप जाए, तो मानसून के समय अच्छी वर्षा होती है।

लेकिन इस वर्ष नौतपा के आखिरी चार दिनों में कई इलाकों में बारिश देखने को मिली। उत्तराखंड सहित देश के अनेक हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली और तीखी गर्मी की जगह बादल, आंधी और बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। मौसम विज्ञान इसे पश्चिमी विक्षोभ और दूसरे मौसमी कारणों से जोड़कर देखता है, जबकि ज्योतिष की दृष्टि में इसे एक विशेष संकेत के रूप में आंका जा रहा है।

क्या नौतपा में लगातार बारिश होना सामान्य है?

ज्योतिषी अखिलेश पांडेय का कहना है कि नौतपा के दौरान लगातार बारिश होना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। उनके अनुसार जब इस अवधि में सूर्य की तपिश घट जाती है और वर्षा होने लगती है, तो आने वाले महीनों में मौसम का स्वभाव कुछ अस्थिर रह सकता है।

उनका मानना है कि यह संकेत अधिक वर्षा, अचानक मौसम परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक चुनौतियों की संभावना को बढ़ा सकता है। पिछले वर्ष भी नौतपा के दौरान कई इलाकों में बारिश दर्ज हुई थी, और इसके बाद मानसून सीजन में उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में भारी वर्षा तथा भूस्खलन की घटनाएं सामने आई थीं।

रुद्रप्रयाग जिले के धारकोट और आसपास के इलाकों में भूस्खलन और सड़कों के बाधित होने जैसी घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। यही वजह है कि इस बार भी नौतपा में हुई बारिश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

नौतपा में वर्षा का क्या असर पड़ता है

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों, नक्षत्रों और ऋतु परिवर्तन के आपसी संबंध को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि यदि नौतपा के दौरान धूप लगातार तेज बनी रहे, तो धरती और वातावरण में ऐसा संतुलन बनता है जो आगे चलकर बेहतर वर्षा का आधार बनता है। इसके विपरीत यदि इस अवधि में बार-बार बादल और बारिश सक्रिय हो जाएं, तो मौसम के चक्र में बदलाव दिखाई दे सकता है।

जानकारों के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से बेहतर रह सकता है, लेकिन बीच-बीच में अत्यधिक वर्षा और मौसम की अनिश्चितता भी देखने को मिल सकती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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