राजस्थान
59 मिनट पहले
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कभी पानी की किल्लत और रोजगार के लिए पलायन की मार झेल रहे जयपुर ग्रामीण के अनेक गांव आज जल संरक्षण के बेहतरीन उदाहरण के रूप में सामने आए हैं। यहां के लोगों ने मिलकर जो प्रयास किए, उसका असर अब साफ नजर आने लगा है। जिन इलाकों में कभी सूखा पसरा रहता था, वहां अब तालाब लबालब भरे हुए हैं और चारों ओर हरियाली लौट आई है।
श्रमदान से पुनर्जीवित हुए पुराने तालाब
ग्रामीणों ने अपने श्रम से पुराने और उपेक्षित पड़े तालाबों को दोबारा जीवित किया। इस मेहनत का नतीजा यह रहा कि बारिश के पानी का संचयन पहले से कहीं बेहतर ढंग से होने लगा। तालाबों की सफाई और मरम्मत में गांव के लोगों की सामूहिक भागीदारी ने इस बदलाव की नींव रखी।
भूजल स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
देवला ग्राम पंचायत क्षेत्र में तैयार किए गए तीन बड़े तालाबों ने इलाके की तस्वीर बदल दी है। इन तालाबों की वजह से भूजल स्तर करीब 25 फीट तक बढ़ने का दावा किया गया है। पानी के इस संचयन ने आसपास के कुओं और जलस्रोतों को भी नई ताकत दी है।
हरियाली के साथ पशु-पक्षियों को राहत
तालाबों में पानी भर जाने से क्षेत्र में हरियाली बढ़ गई है। इसका लाभ केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पशु-पक्षियों को भी राहत मिली है, जिन्हें अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता।
सामूहिक प्रयास ला रहे बदलाव
स्थानीय लोगों का मानना है कि मिल-जुलकर किए गए इन्हीं प्रयासों की बदौलत गांवों में पानी की समस्या धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। उनका कहना है कि अगर इसी तरह सामूहिक भागीदारी बनी रही, तो आने वाले समय में जल संकट का नामोनिशान नहीं बचेगा।
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