बिहार की मशहूर दाल पीठा: स्वाद और सेहत से भरपूर है यह पारंपरिक व्यंजन, ऐसे बनाएं घर पर जीवनशैली एक महीने पहले 64
बिहार के लिट्टी-चोखा की तरह दाल पीठा भी वहां की संस्कृति का एक खास हिस्सा है। बिना तेल के स्टीम करके बनने वाला यह व्यंजन स्वाद में लाजवाब और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है।

बिहार का पारंपरिक स्वाद

जब भी बिहारी खानपान का जिक्र होता है, तो लिट्टी-चोखा का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन बिहार की थाली में दाल पीठा का स्थान भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसे अक्सर बिहार का मोमोज भी कहा जाता है, हालांकि इसका स्वाद पूरी तरह से देसी और मसालेदार होता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे भाप में पकाया जाता है, इसलिए यह तेल मुक्त और स्वस्थ होता है।

आवश्यक सामग्री

  • 2 कप चावल का आटा
  • 2.5 कप पानी
  • 1 छोटा चम्मच नमक
  • 1 कप चना दाल (जिसे 4-5 घंटे पहले भिगोया गया हो)
  • 3-4 हरी मिर्च
  • 5-6 लहसुन की कलियां
  • 1 इंच अदरक का टुकड़ा
  • 1/2 छोटा चम्मच हल्दी
  • 1/2 छोटा चम्मच जीरा पाउडर
  • नमक स्वादानुसार
  • बारीक कटा हुआ हरा धनिया

बनाने की विधि

स्टफिंग तैयार करना

सबसे पहले भीगी हुई चना दाल का पानी निकाल लें। अब एक मिक्सी जार में चना दाल, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक को दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। इस तैयार मिश्रण में हल्दी, जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक और हरा धनिया मिलाकर अच्छी तरह रख लें।

आटा गूंथना

एक कड़ाही में पानी और थोड़ा सा नमक डालकर उबालें। जब पानी खौलने लगे, तो इसमें धीरे-धीरे चावल का आटा डालें और लगातार चलाते रहें ताकि गुठलियां न बनें। गैस बंद करके मिश्रण को 5 मिनट के लिए ढककर छोड़ दें। जब यह हल्का गुनगुना रह जाए, तो हाथों में थोड़ा घी या पानी लगाकर इसे मुलायम आटे की तरह गूंथ लें।

पीठा को आकार देना

आटे से छोटी लोइयां निकालें और उन्हें कटोरी जैसा आकार दें। अब इसमें 1 से 1.5 चम्मच चना दाल का मिश्रण भरकर किनारों को जोड़ दें। आप इसे गुझिया या अर्धचंद्राकार का आकार दे सकते हैं।

स्टीम करना

स्टीमर या किसी गहरे बर्तन में पानी उबालें। स्टीमर की जाली पर हल्का तेल लगाएं ताकि पीठा चिपके नहीं। अब तैयार पीठे को जाली पर रखें और मध्यम से तेज आंच पर 12-15 मिनट तक स्टीम करें। पकने के बाद इन्हें ठंडा होने दें और गरमा-गरम सर्व करें।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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