कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू उत्पादों पर बड़ा प्रहार, पूरे एक साल के लिए लगी पूर्ण पाबंदी राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
कर्नाटक सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए गुटखा, पान मसाला और निकोटीन युक्त तंबाकू उत्पादों पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें निर्माण से लेकर बिक्री तक सब कुछ शामिल है।

कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू के कारोबार पर सख्त रोक

अगर आप कर्नाटक में रहते हैं और गुटखा, पान मसाला या किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद का सेवन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गुटखा और निकोटीन आधारित तंबाकू उत्पादों के खिलाफ एक कड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने इन उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और खुदरा बिक्री पर पूरे एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा।

प्रतिबंध के दायरे में क्या-क्या आता है

कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस प्रतिबंध की सीमा बहुत विस्तृत है। इसमें केवल वे उत्पाद ही शामिल नहीं हैं जो सीधे गुटखा या पान मसाला के रूप में बिकते हैं, बल्कि उन सभी उत्पादों पर रोक लगाई गई है जिनमें तंबाकू या निकोटीन की मात्रा मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था निम्नलिखित गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकती है:

  • इन उत्पादों का निर्माण करना।
  • प्रतिबंधित सामग्री का भंडारण करना।
  • एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान का परिवहन करना।
  • बाजार में उत्पादों का वितरण करना।
  • अंतिम रूप से इनकी बिक्री करना।

यह आदेश 10 अगस्त को जारी किया गया था और इसे जारी होने की तारीख से अगले एक साल तक प्रभावी माना जाएगा। सरकार का लक्ष्य राज्य में इन हानिकारक पदार्थों की उपलब्धता को पूरी तरह समाप्त करना है।

सप्लाई चेन पर सरकार की कड़ी नजर

इस फैसले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विभाग ने केवल खुदरा दुकानों पर छापा मारने तक सीमित रहने के बजाय पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि बाजार में कोई प्रतिबंधित उत्पाद मिलता है, तो केवल दुकान तक न रुकें बल्कि यह भी पता लगाएं कि यह उत्पाद कहाँ निर्मित हुआ है और किस मार्ग से होकर यहाँ तक पहुँचा है।

गोदामों और भंडारण केंद्रों पर विशेष रूप से निगरानी रखी जाएगी। जिन लोगों को इन उत्पादों को स्टोर करने का संदेह है, उनकी गहनता से जांच की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि जड़ से इस नेटवर्क को नहीं तोड़ा गया, तो प्रतिबंध का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। इसलिए, विनिर्माण इकाइयों से लेकर वितरण केंद्रों तक सभी की जांच की जाएगी ताकि अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।

अलग-अलग पैकेट वाले उत्पादों पर विशेष नियम

अधिसूचना में एक और महत्वपूर्ण पहलू को रेखांकित किया गया है। अक्सर देखा गया है कि प्रतिबंध से बचने के लिए व्यापारी अलग-अलग पैकेटों में उत्पाद बेचते हैं, जिन्हें ग्राहक बाद में मिलाकर सेवन कर सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे पैकेटों को भी प्रतिबंधित उत्पादों की श्रेणी में ही रखा जाएगा। यदि अंतिम उत्पाद में निकोटीन या तंबाकू की उपस्थिति है या इन्हें मिलाकर सेवन किया जाना संभव है, तो ऐसे मामलों पर भी खाद्य सुरक्षा विभाग कार्रवाई करेगा। इस तरह के जुगाड़ या तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर कानून से बचने की कोशिश करने वालों पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पूरे राज्य में शुरू हुआ सघन जांच अभियान

आदेश के लागू होते ही, पूरे कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे उन सभी स्थानों की तलाशी लें जहाँ इन उत्पादों के अवैध निर्माण या जमाखोरी की संभावना है। सरकार चाहती है कि यह प्रतिबंध केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी नजर आए।

आम जनता से सहयोग की अपील

इस नशा-मुक्त अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार ने कर्नाटक की जनता से भी सक्रिय सहयोग मांगा है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास कहीं भी प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटीन उत्पादों के निर्माण, बिक्री या भंडारण की कोई भी जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत विभाग के संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। सरकार का मानना है कि नागरिकों की भागीदारी के बिना इस तरह के सामाजिक सरोकार वाले नियमों को पूरी तरह लागू करना मुश्किल होता है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक को एक स्वस्थ और नशा-मुक्त राज्य बनाना है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो लोग इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। राज्य प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि अगले एक साल तक किसी भी कीमत पर इन हानिकारक उत्पादों को बाजार में न आने दिया जाए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप