शहबाज शरीफ का फिर भारत को निशाना बनाने का प्रयास, जल और युद्ध की धमकियों के बीच घरेलू मुद्दों पर साधी चुप्पी विश्व एक घंटा पहले 4
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए युद्ध और जल विवाद पर धमकी दी है, जबकि बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली।

पाकिस्तान का पुराना हथकंडा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने देश के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगला है। इस्लामाबाद में 'यादगार-ए-फतह' स्मारक का अनावरण करते हुए उन्होंने भारत को पानी और जंग की सीधी धमकी दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि शहबाज शरीफ का यह बयान केवल पाकिस्तान के भीतर मौजूद एक विशेष वर्ग को संतुष्ट करने और घरेलू मोर्चे पर गिरती साख को बचाने की एक सोची-समझी कोशिश है। देश में चल रहे व्यापक प्रदर्शनों से घिरी अपनी सरकार का ध्यान भटकाने के लिए उन्होंने भारत को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया है।

सिंधु जल संधि और युद्ध का राग

शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में दावा किया कि मई 2025 में पाकिस्तान ने भारत को हराया था। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा पर कोई भी आंच आई, तो उसे और अधिक कठोर जवाब दिया जाएगा। उनके भाषण का मुख्य केंद्र बिंदु सिंधु जल संधि और कश्मीर का विवादित मुद्दा रहा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी की एक-एक बूंद उनकी रेड लाइन है। उन्होंने भारत को 'सही रास्ते पर आने' की नसीहत देते हुए यह भी जोड़ा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पाकिस्तान उन्हें सीधा जवाब देने में संकोच नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय स्थिरता का पक्षधर है, लेकिन उनकी शांति की इच्छा को कमजोरी समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए।

मुनीर और ट्रंप की प्रशंसा

शहबाज शरीफ ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में हुए युद्धविराम को पाकिस्तान की जीत के तौर पर पेश किया। इस अवसर पर उन्होंने पाकिस्तानी सेना और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उस संघर्ष के बाद दुनिया में पाकिस्तान का मान बढ़ा है। 'यादगार-ए-फतह' स्मारक का उद्घाटन राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल मुनीर ने संयुक्त रूप से किया, जिसका उद्देश्य इस नैरेटिव को मजबूत करना था। इसके अलावा, शहबाज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना करते हुए 2025 में हुए सीजफायर में उनकी भूमिका का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने भविष्य में पाकिस्तान और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों के और अधिक प्रगाढ़ होने की उम्मीद भी जताई।

अंदरूनी कलह पर मौन

दिलचस्प बात यह है कि भारत को दहाड़ कर धमकी देने वाले शहबाज शरीफ अपने ही देश की जमीनी हकीकत पर पूरी तरह खामोश रहे। उन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर अपना पुराना घिसा-पिटा रुख दोहराते हुए कहा कि कश्मीरियों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। लेकिन, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में पिछले काफी समय से चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला। यही नहीं, बलूचिस्तान के भीतर अपने ही नागरिकों के खिलाफ की जा रही कठोर सैन्य कार्रवाई और हालिया एयरस्ट्राइक को लेकर भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी। यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री घरेलू समस्याओं, बलूचिस्तान के विद्रोह और PoK के असंतोष से जनता का ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ आक्रामक बयानों का सहारा ले रहे हैं ताकि वे अपनी कुर्सी बचा सके।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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