विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: पीएम मोदी का भावुक संदेश, 1947 के जख्मों और संघर्षों को किया याद भारत एक घंटा पहले 5
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने 1947 के बंटवारे में अपार कष्ट सहा और शून्य से अपना जीवन फिर से खड़ा किया।

1947 के उन जख्मों को याद कर रहा है पूरा देश

भारत में आज 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। यह दिन उस अकल्पनीय पीड़ा और उन लोगों को समर्पित है जिन्होंने 1947 में देश के बंटवारे के दौरान अपनी जान गंवाई और असहनीय दुख झेला। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश के बड़े हिस्सों में जो विभाजन की लकीर खींची गई, उसने करोड़ों लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। पंजाब और बंगाल के उन विभाजित क्षेत्रों से लाखों लोग अपना घर, अपनी जमीन और अपना सबकुछ छोड़कर आजाद भारत में शरण लेने आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन संघर्षशील लोगों के अद्भुत साहस और जज्बे को सलाम किया है।

पीएम मोदी ने साझा किया भावुक संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 1947 की उन दुखद घटनाओं को याद किया। सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, हम उन सभी लोगों के अदम्य साहस को नमन करते हैं जो विभाजन की त्रासदी से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। यह इतिहास का वह काला दौर था जिसने न जाने कितनी जिंदगियों को उथल-पुथल कर दिया था। इस बंटवारे के कारण न केवल परिवार बिखर गए और अपनों का साथ छूटा, बल्कि लोगों ने भारी पीड़ा का सामना भी किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियों से घबराने के बजाय, इन लोगों ने शून्य से शुरुआत की और अपने कठिन परिश्रम से जीवन को पुनः निर्मित किया। आज उनकी वही संघर्ष-यात्राएं हमें मानवीय शक्ति की असीम क्षमता का अहसास कराती हैं और हमें देश की प्रगति में उनके अमूल्य योगदान की याद दिलाती हैं।

प्रधानमंत्री ने आगे यह भी कहा कि आज का यह दिन हमारे देश की एकता, आपसी सद्भाव और भाईचारे को अक्षुण्ण रखने के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर है। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एकजुट होकर कार्य करें।

विपरीत परिस्थितियों में संकल्पों की सिद्धि

अपने एक अन्य संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर वे उन सभी नागरिकों को हृदय से नमन करते हैं, जिन्होंने उस अत्यंत कठिन दौर से बाहर निकलकर राष्ट्र की उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लोगों ने अपने सामर्थ्य से यह साबित कर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने एकता और सद्भावना की राष्ट्रीय भावना को और अधिक सशक्त करने पर बल देते हुए संस्कृत के श्लोक के माध्यम से कर्म और पुरुषार्थ की महत्ता को रेखांकित किया।

इस दिन की शुरुआत का उद्देश्य

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में इस दिवस को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाने की आधिकारिक घोषणा की थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उन परिस्थितियों और पीड़ा से अवगत कराना है, जो 1947 के विभाजन के समय देश ने झेली थी। सरकार का मानना है कि यह आयोजन समाज को उन ताकतों के प्रति सचेत करता है जो देश को बांटने की कोशिश करती हैं। आज के दिन उन परिवारों की व्यथा को याद किया जाता है, जैसे कि नानकचंद का परिवार। नानकचंद लाहौर में सोने के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे और फूला मंडी में उनकी दुकान थी। एक खुशहाल जीवन जीने वाले इस परिवार का सब कुछ विभाजन की भेंट चढ़ गया था।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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