बहराइच की रीता देवी 22000 की मशीन से बना रहीं रूई की पूजा बत्ती, 10 रुपये के पैक से अच्छी कमाई उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 52
बहराइच के पयागपुर की रीता देवी 22000 रुपये की मशीन से रूई की पूजा बत्ती तैयार कर रही हैं और इसे 10 रुपये प्रति पैकेट बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।

पूजा-पाठ के दौरान लोग तेल और घी के दीप जलाते हैं और इन्हें रोशन करने के लिए रूई की बत्ती का इस्तेमाल करते हैं। अधिकतर लोग बाजार से रूई की बत्ती खरीदकर लाते हैं, लेकिन गोल आकार की होने के कारण यह दीप में रखते ही ढुलक जाती है। साथ ही बाजार में मिलने वाली यह बत्ती कुछ महंगी भी पड़ती है। अब बहराइच जिले में महिलाएं इसी खास रूई बत्ती को 22000 रुपये की मशीन से तैयार कर रही हैं और 10 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बेचकर अच्छा काम कर रही हैं, जिससे उनका कारोबार लगातार फल-फूल रहा है।

क्या है इस रूई बत्ती मशीन की खासियत

बहराइच जिले के पयागपुर क्षेत्र की रहने वाली रीता देवी ने इस मशीन की विशेषताओं के बारे में बताया। उनका कहना है कि वैसे तो रूई बनाने की कई तरह की मशीनें बाजार में मौजूद हैं, लेकिन कम बजट में 22000 रुपये की यह मशीन रूई बत्ती बनाने के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है। इसमें एक तरफ से कपास डाला जाता है और दूसरी तरफ से रूई की बत्ती अपने आप बनकर निकलती रहती है।

इस मशीन से बनी रूई बत्ती गोल होती है और नीचे की ओर से थोड़ी चपटी रहती है, जिसके चलते दीप में रखने पर यह ढुलकती नहीं और सुचारू रूप से जलती रहती है।

हर महीने 25 किलो कॉटन की खपत

रूई बत्ती के इस काम से रीता देवी न सिर्फ आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अपने गांव समेत पूरे जिले में खूब नाम भी कमा रही हैं। महीने की खपत की बात करें तो हर महीने 25 किलो कॉटन की पूजा रूई बत्ती बनाकर आराम से खपा दी जाती है।

लागत के हिसाब से देखें तो 300 रुपये प्रति किलो की लागत पर तैयार रूई बत्ती बनने के बाद 700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से आसानी से बिक जाती है। वहीं जब इसकी पैकिंग कर 10 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से बेचा जाता है, तो मुनाफा और भी बढ़ जाता है। रीता देवी ने यह भी बताया कि शुरुआती दौर में प्रतिमाह 25 किलो कॉटन की खपत हो जाती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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