न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात करने जा रहे थे जिनपिंग, उससे पहले किम जोंग की बहन ने तय कर दिया एजेंडा विश्व एक घंटा पहले 2
करीब सात साल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां किम जोंग उन से उनकी मुलाकात होगी। इससे पहले ही किम की बहन किम यो जोंग ने साफ कर दिया कि परमाणु हथियार किसी शर्त पर खत्म नहीं किए जाएंगे।

करीब सात साल के अंतराल के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग उत्तर कोरिया की यात्रा पर पहुंच रहे हैं, जहां वे उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे को एशिया की भू-राजनीति के बदलते स्वरूप के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के एजेंडे में सबसे अहम मुद्दा न्यूक्लियर प्रोग्राम का है, लेकिन उससे पहले ही किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने तस्वीर साफ कर दी है।

किम यो जोंग ने कहा कि परमाणु हथियार खत्म करने की अमेरिका की मांग पुराने जमाने का सपना भर है। उनके मुताबिक उत्तर कोरिया का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट आत्मरक्षा के लिए है, लिहाजा इसे किसी भी शर्त पर बंद नहीं किया जा सकता।

डोनाल्ड ट्रंप फैक्टर

यह मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर व्हाइट हाउस में हैं। पिछले महीने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई थी, जिसके बाद अमेरिका ने कहा था कि दोनों नेताओं का मकसद कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करना है।

इसके उलट किम जोंग उन लगातार अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाते जा रहे हैं। दिलचस्प यह है कि बीते कुछ महीनों में चीन ने उत्तर कोरिया के डिन्यूक्लियराइजेशन को लेकर पहले जैसी सख्त भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है। जानकारों का मानना है कि चीन का साथ मिलने से किम को अमेरिका के साथ भविष्य की किसी भी बातचीत में मजबूती मिलेगी।

किम जोंग उन को चीन की जरूरत क्यों

पिछले कुछ सालों में उत्तर कोरिया रूस के काफी करीब आ गया है। यूक्रेन युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया ने रूस को सैनिकों तक की मदद पहुंचाई और बदले में उसे आर्थिक तथा सैन्य सहयोग मिला। हालांकि अकेले रूस के सहारे उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था नहीं चल सकती।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अपने लोगों और देश के हालात सुधारने के लिए किम जोंग उन को चीन की आर्थिक मदद और निवेश की जरूरत है। यही वजह है कि किम अब बीजिंग के साथ रिश्तों को दोबारा मजबूत करना चाहते हैं। चर्चा है कि दोनों नेता चीनी सैलानियों को फिर से उत्तर कोरिया आने की इजाजत देने पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा सीमा पर व्यापार बढ़ाने और नए आर्थिक प्रोजेक्ट पर भी बातचीत संभव है।

चीन क्या हासिल करना चाहता है

चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकी से वह कुछ हद तक असहज भी रहा है। ऐसे में शी जिनपिंग की यह यात्रा उत्तर कोरिया को दोबारा अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश मानी जा रही है। चीन नहीं चाहता कि उसका पारंपरिक सहयोगी पूरी तरह रूस के पाले में चला जाए।

फायदे में कौन रहेगा

इस यात्रा से किम जोंग उन को आर्थिक मदद और कूटनीतिक समर्थन मिलने की उम्मीद है, जबकि चीन उत्तर कोरिया पर अपना प्रभाव फिर से मजबूत करना चाहता है। हालांकि आज का उत्तर कोरिया पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। रूस के साथ उसके गहरे रिश्ते चीन के लिए नई चुनौती भी बन सकते हैं।

यही कारण है कि दुनिया भर की निगाहें इस मुलाकात पर टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे सिर्फ चीन और उत्तर कोरिया ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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