उपनाम: जल संरक्षण
राजस्थान का रहस्यलोक: जवाई बांध और श्रीराम के तीर की कथा से जुड़ी जिज्ञासा, क्या बदलेगी रेगिस्तान की सूरत?
जवाई बांध जल संरक्षण के साथ-साथ लोककथाओं और प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक भी है, जहां श्रीराम के तीर की किंवदंती और बढ़ती हरियाली ने नई चर्चा छेड़ दी है।
तालाब की खुदाई में मिला 250 साल पुराना अतीत, कीर्ति स्तंभ और शिलालेख ने उजागर किए इतिहास के पन्ने
बीकानेर के सिंसा भैरव तालाब की खुदाई में प्राचीन प्रतिमा, शिलालेख और कीर्ति स्तंभ मिले हैं। शिलालेख के अनुसार तालाब का निर्माण विक्रम संवत 1837 में हुआ था।
मेहंदी का कुआं: कभी मीठे पानी के लिए मशहूर था यह कुआं, अब उपेक्षा का शिकार बनी अनमोल विरासत
जयपुर के रामनिवास बाग में स्थित 18वीं सदी का मेहंदी का कुआं कभी अपने मीठे और गुणकारी पानी के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन आज यह कचरे से भरा और उपेक्षित पड़ा है।
बाड़मेर में रेलवे की जल संरक्षण पहल: लॉन्ड्री का पानी अब दोबारा बनेगा उपयोगी
बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाके में रेलवे ने उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला वॉटर रीसाइक्लिंग प्लांट शुरू किया है, जहाँ लॉन्ड्री का इस्तेमाल किया गया पानी ट्रीटमेंट के बाद दोबारा काम आएगा।
बिहार का वह बेटा जिसने IAS बनने के बाद दो बार माउंट एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा
उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रविंद्र कुमार ने प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ पर्वतारोहण और जल संरक्षण में भी अलग पहचान बनाई है। दो बार एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने वाले इस अधिकारी को अब देश के 25 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों की सूची में शामिल किया गया है।
हर दिशा से उतरती सीढ़ियां और जल बचाने की अनोखी तकनीक: यही है चोपड़ा बावड़ी का असली रहस्य
धौलपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी अपनी चारों दिशाओं से उतरती सीढ़ियों और प्राचीन जल संरक्षण तकनीक के कारण आज भी सबको हैरान करती है। यह राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य विरासत का अनूठा उदाहरण मानी जाती है।
जल संकट से जूझते गांवों में लौटी खुशहाली, श्रमदान से पुनर्जीवित हुए तालाब भरे पानी से
जयपुर ग्रामीण के कई गांव सामूहिक श्रमदान से जल संरक्षण की मिसाल बन गए हैं। देवला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बने तीन बड़े तालाबों से भूजल स्तर करीब 25 फीट तक बढ़ने का दावा किया गया है।
सिंचाई की दिक्कत से जूझ रहे हैं? इन दो आसान तरीकों से बचेगा पानी और घटेगी लागत
गोरखपुर और आसपास के इलाकों में किसानों के लिए जल संकट बड़ी मुसीबत बन गया है। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि ड्राई लैंड एग्रीकल्चर और कुछ खास उपायों से पानी की बचत संभव है।
बांज का पेड़: पहाड़ों का 'जल प्रहरी', जहां ये मौजूद वहां नहीं रहती पानी की किल्लत
उत्तराखंड के पहाड़ों में बांज का पेड़ जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। इसकी गहरी जड़ें भूजल को बनाए रखती हैं, जिससे नौले, धारे और गधेरे आज भी जीवित हैं।
गांव की प्यास बुझाने निकले दो किसान, फसल छोड़ी पर 5 हजार लोगों को दे रहे पानी
खंडवा के बांगड़दा गांव में दो किसानों ने इस बार गर्मी की फसल छोड़कर अपने कुएं पंचायत की टंकी से जोड़ दिए, जिससे करीब 4 से 5 हजार लोगों को लगातार पीने का पानी मिल रहा है।