राजस्थान
एक घंटा पहले
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विचारों
जयपुर की पहचान केवल उसके किलों, महलों और रौनक भरे बाजारों तक सीमित नहीं है। इस शहर की गलियों में बसे प्राचीन कुएं और बावड़ियां भी इसकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसी ही एक धरोहर है रामनिवास बाग में मौजूद मेहंदी का कुआं, जिसका इतिहास 18वीं सदी तक जाता है।
मीठे पानी की वजह से बनी खास पहचान
कभी यह कुआं पूरे जयपुर में अपने मीठे और गुणकारी जल के लिए जाना जाता था। स्थानीय निवासियों और इतिहास के जानकारों की मानें तो इसका पानी इतना उपयोगी समझा जाता था कि डॉक्टर और वैद्य तक लोगों को इसे पीने की सलाह दिया करते थे। माना जाता था कि यह जल पेट से जुड़ी कई बीमारियों में राहत पहुंचाता है। इसकी प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से राजपरिवार तक के लिए पानी पहुंचाया जाता था।
समय के साथ खोई अपनी चमक
लेकिन वक्त बीतने के साथ हालात बदलते चले गए। भूजल स्तर में लगातार गिरावट और देखरेख के अभाव ने इस ऐतिहासिक जल स्रोत को उसकी असली पहचान से दूर कर दिया। आज यह कुआं कचरे से भरा हुआ नजर आता है और अपनी पुरानी गरिमा खो चुका है।
आज भी झलकता है गौरवशाली अतीत
इस उपेक्षा के बावजूद इसकी बनावट, पुरानी रेलिंग और जल निकासी की व्यवस्था आज भी इसके शानदार बीते दौर की गवाही देती हैं। यही कारण है कि आसपास रहने वाले लोग इस धरोहर को बचाने और इसके संरक्षण की लगातार मांग कर रहे हैं।
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