मेहंदी का कुआं: कभी मीठे पानी के लिए मशहूर था यह कुआं, अब उपेक्षा का शिकार बनी अनमोल विरासत राजस्थान 3 महीने पहले 43
जयपुर के रामनिवास बाग में स्थित 18वीं सदी का मेहंदी का कुआं कभी अपने मीठे और गुणकारी पानी के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन आज यह कचरे से भरा और उपेक्षित पड़ा है।

जयपुर की पहचान केवल उसके किलों, महलों और रौनक भरे बाजारों तक सीमित नहीं है। इस शहर की गलियों में बसे प्राचीन कुएं और बावड़ियां भी इसकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसी ही एक धरोहर है रामनिवास बाग में मौजूद मेहंदी का कुआं, जिसका इतिहास 18वीं सदी तक जाता है।

मीठे पानी की वजह से बनी खास पहचान

कभी यह कुआं पूरे जयपुर में अपने मीठे और गुणकारी जल के लिए जाना जाता था। स्थानीय निवासियों और इतिहास के जानकारों की मानें तो इसका पानी इतना उपयोगी समझा जाता था कि डॉक्टर और वैद्य तक लोगों को इसे पीने की सलाह दिया करते थे। माना जाता था कि यह जल पेट से जुड़ी कई बीमारियों में राहत पहुंचाता है। इसकी प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से राजपरिवार तक के लिए पानी पहुंचाया जाता था।

समय के साथ खोई अपनी चमक

लेकिन वक्त बीतने के साथ हालात बदलते चले गए। भूजल स्तर में लगातार गिरावट और देखरेख के अभाव ने इस ऐतिहासिक जल स्रोत को उसकी असली पहचान से दूर कर दिया। आज यह कुआं कचरे से भरा हुआ नजर आता है और अपनी पुरानी गरिमा खो चुका है।

आज भी झलकता है गौरवशाली अतीत

इस उपेक्षा के बावजूद इसकी बनावट, पुरानी रेलिंग और जल निकासी की व्यवस्था आज भी इसके शानदार बीते दौर की गवाही देती हैं। यही कारण है कि आसपास रहने वाले लोग इस धरोहर को बचाने और इसके संरक्षण की लगातार मांग कर रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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