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58 मिनट पहले
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राजस्थान के रेगिस्तानी जिले बाड़मेर में, जहाँ पानी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है, रेलवे ने जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यहाँ उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वॉटर रीसाइक्लिंग प्लांट की शुरुआत की गई है, जो पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का एक नया उदाहरण पेश कर रहा है।
कैसे काम करेगा यह प्लांट
इस अत्याधुनिक संयंत्र में लॉन्ड्री से निकलने वाले गंदे पानी को विशेष ट्रीटमेंट प्रक्रिया से गुज़ारा जाएगा, ताकि वह दोबारा इस्तेमाल के लायक बन सके। इस तरह जो पानी पहले बेकार बह जाता था, अब उसका सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हर महीने लाखों लीटर की बचत
रेलवे महाप्रबंधक अमिताभ के अनुसार इस प्लांट के ज़रिए करीब 80 फीसदी पानी को रीसाइकल कर दोबारा काम में लाया जा सकेगा। इससे हर महीने लाखों लीटर पानी की बचत होने का अनुमान है, जो रेगिस्तानी क्षेत्र के लिए बेहद अहम है।
परियोजना की लागत और महत्व
यह परियोजना करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है। जल संरक्षण के साथ-साथ यह रेलवे के दैनिक संचालन में पानी के समझदारी भरे इस्तेमाल का भी एक सफल मॉडल साबित होगी, जिसे आगे चलकर अन्य स्थानों पर भी अपनाया जा सकता है।
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