तालाब की खुदाई में मिला 250 साल पुराना अतीत, कीर्ति स्तंभ और शिलालेख ने उजागर किए इतिहास के पन्ने राजस्थान 2 महीने पहले 41
बीकानेर के सिंसा भैरव तालाब की खुदाई में प्राचीन प्रतिमा, शिलालेख और कीर्ति स्तंभ मिले हैं। शिलालेख के अनुसार तालाब का निर्माण विक्रम संवत 1837 में हुआ था।

बीकानेर में चल रहे मिशन कायाकल्प अभियान के दौरान इतिहास से जुड़ी अनमोल धरोहरें सामने आई हैं। सिंसा भैरव तालाब की खुदाई के समय जमीन के भीतर से प्राचीन प्रतिमा, शिलालेख और कीर्ति स्तंभ मिलने से पूरे क्षेत्र में उत्साह की लहर दौड़ गई है।

खुदाई में सामने आईं ऐतिहासिक धरोहरें

मिशन कायाकल्प अभियान के तहत जब सिंसा भैरव तालाब की खुदाई का काम शुरू हुआ, तो उसमें कई महत्वपूर्ण पुरावशेष मिले। प्राचीन प्रतिमा के साथ-साथ शिलालेख और कीर्ति स्तंभ का सामने आना स्थानीय लोगों के लिए किसी बड़ी खोज से कम नहीं है। इन धरोहरों ने क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की झलक एक बार फिर ताजा कर दी है।

शिलालेख ने खोले अतीत के राज

इतिहासकारों के अनुसार, खुदाई में मिले शिलालेख में तालाब निर्माण का उल्लेख विक्रम संवत 1837 का दर्ज है। इसी शिलालेख में उस दौर के दानदाताओं और समाजसेवियों के योगदान का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने इस तालाब के निर्माण में अपनी भूमिका निभाई थी।

जल संरक्षण परंपरा की गवाही

यह खोज न केवल क्षेत्र के समृद्ध और गौरवशाली इतिहास को सामने ला रही है, बल्कि सदियों पुरानी जल संरक्षण परंपरा की भी साक्षी बन रही है। इन धरोहरों से यह स्पष्ट होता है कि उस समय भी समाज पानी को सहेजने और जल स्रोतों के निर्माण को कितना महत्व देता था।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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