सिंचाई की दिक्कत से जूझ रहे हैं? इन दो आसान तरीकों से बचेगा पानी और घटेगी लागत उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 44
गोरखपुर और आसपास के इलाकों में किसानों के लिए जल संकट बड़ी मुसीबत बन गया है। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि ड्राई लैंड एग्रीकल्चर और कुछ खास उपायों से पानी की बचत संभव है।

गोरखपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों के लिए पानी की कमी अब एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। धान की बुवाई का मौसम शुरू होते ही भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसकने लगता है, जबकि धान की फसल को पानी की कहीं अधिक आवश्यकता रहती है।

समय पर पर्याप्त सिंचाई न मिल पाने की स्थिति में फसल के सूख जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि कुछ कारगर उपायों को अपनाकर इस समस्या से निपटा जा सकता है।

गिरते भूजल का समाधान क्या है

कृषि विशेषज्ञ अनुपम दुबे के अनुसार लगातार नीचे जा रहे भूजल स्तर को ध्यान में रखते हुए किसानों को अब ड्राई लैंड एग्रीकल्चर यानी शुष्क भूमि खेती की ओर रुख करना चाहिए। यह तरीका कम पानी में भी बेहतर खेती करने का रास्ता खोलता है।

पानी बचाने के कारगर उपाय

विशेषज्ञ बताते हैं कि खेतों में नमी को बनाए रखने, मल्चिंग करने और वर्षा जल के संचयन जैसी विधियों को अपनाकर पानी की काफी बचत की जा सकती है। इन तरीकों से न सिर्फ सिंचाई पर निर्भरता घटती है, बल्कि खेती की लागत में भी कमी आती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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