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गया के पहले फोटो पत्रकार श्याम भंडारी की कहानी: स्टूडियो मालिक से बने पत्रकार, छात्र आंदोलन ने बदली तकदीर
गया के श्याम भंडारी ने उस दौर में पत्रकारिता में कदम रखा जब सुविधाएं बेहद सीमित थीं। 1974 के छात्र आंदोलन की तस्वीरों ने उन्हें स्टूडियो मालिक से एक चर्चित फोटो जर्नलिस्ट के रूप में स्थापित कर दिया।
गया में महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनी 'दीदी अधिकार केंद्र', घरेलू हिंसा से लेकर सरकारी योजनाओं तक का समाधान
बिहार के गया जिले में 'दीदी अधिकार केंद्र' उन महिलाओं के लिए बड़ी राहत बनकर उभरे हैं जो घरेलू हिंसा या सरकारी सुविधाओं की कमी से जूझ रही हैं। जीविका के सहयोग से संचालित इन केंद्रों ने अब तक सैकड़ों महिलाओं को न्याय और आत्मनिर्भरता दिलाई है।
गया: जब टिकट के लिए होती थी जंग, जानिए पैराडाइज सिनेमाघर से जुड़ी वो सुनहरी यादें
आज के डिजिटल दौर से बहुत पहले गया शहर में सिनेमाघर मनोरंजन का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। एक वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट ने साझा की अपनी पुरानी यादें, जब सिनेमा देखने जाना किसी संघर्ष से कम नहीं था।
गया में मौत के मुंह से लौटा मासूम: 30 फीट गहरे बोरवेल में 7 घंटे फंसा रहा बच्चा, NDRF ने बचाई जान
बिहार के गया जिले में एक तीन साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया था, जिसे करीब 7 घंटे चले कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और प्रशासन ने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
गया में खौफनाक हादसा: 3 साल का मासूम 30 फीट गहरे बोरवेल में फंसा, युद्धस्तर पर रेस्क्यू जारी
बिहार के गया जिले में एक 3 साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया है, जिसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और राहत दल की टीमें जुटी हुई हैं।
गया का तेतर डैम: दो पहाड़ों के बीच छिपा है प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना, मानसून में खिल उठती है वादियों की रौनक
बिहार के गया जिले में स्थित तेतर डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए चर्चा में रहता है। यह डैम गंगा जल आपूर्ति योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मानसून के दौरान इसकी छटा देखते ही बनती है।
गया के लाल सोमन राणा का कमाल: देश सेवा में गंवाया पैर, अब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखाएंगे दम
बिहार के गया निवासी सोमन राणा 2026 में ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। देश की सुरक्षा में अपना पैर खोने वाले सोमन ने अपनी शारीरिक बाधा को कभी भी अपनी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया।
लाल नहीं, अब पीले तरबूज की बढ़ रही है धूम, सेहत के लिए है बेहद गुणकारी
गया में किसान अब पीले तरबूज की खेती कर रहे हैं, जो लाल तरबूज से न केवल अधिक मुनाफे वाला है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी वरदान माना जाता है।
मशहूर अभिनेता राजेश कुमार का फिल्मी सफर: कर्ज में डूबकर छोड़ दी थी एक्टिंग, अब गांव में बहनों के साथ करेंगे खेती
लोकप्रिय अभिनेता राजेश कुमार मुंबई की चकाचौंध से दूर अपने पैतृक गांव गया लौट आए हैं, जहां वे अब खेती के एक बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी कर रहे हैं। इस नेक काम में विदेशों से वापस आ रही उनकी बहनें भी उनका साथ देंगी।
गया में हिंदू कारीगर प्रदीप शर्मा का कमाल, मुहर्रम के लिए बनाया हेलीकॉप्टर वाला अनोखा ताजिया
बिहार के गया जिले में इस बार मुहर्रम का ताजिया चर्चा का विषय बना हुआ है। इमामगंज के झिकटिया गांव के एक हिंदू कारीगर प्रदीप शर्मा ने हेलीकॉप्टर के आकार का ताजिया तैयार कर सामाजिक एकता की मिसाल पेश की है।
गया: चार पीढ़ियों से ताजिया बना रहा यह परिवार, 40 रुपये से शुरू हुआ था हुनर का सफर
बिहार के गया जिले में एक ऐसा परिवार है जो पिछले चार दशकों से मुहर्रम के मौके पर ताजिया बनाने की परंपरा को जीवित रखे हुए है। आज यह परिवार अपने शानदार काम के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
गया में मछली पालन को मिलेगा बढ़ावा: बीज उत्पादन की 12 इकाइयों पर सरकार देगी 70 फीसदी तक सब्सिडी
बिहार के गया जिले में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार नई योजनाएं लाई है, जिसके तहत बीज उत्पादन की 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इन योजनाओं में किसानों को 70 फीसदी तक अनुदान का लाभ मिलेगा।
BPSC सफलता की कहानी: रेलवे से रिटायर पिता की मेहनत रंग लाई, तीनों बच्चे बने सरकारी अफसर
बिहार के गया में एक पिता ने अपने तीनों बच्चों को ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। जहाँ बेटा बैंक मैनेजर और बेटी SBI में अधिकारी हैं, वहीं अब सबसे छोटा बेटा BPSC पास कर राजस्व अधिकारी बन गया है।
गया की निराली 'मंथन वाटिका': हर पौधे पर दर्ज है किसी IAS अधिकारी का नाम, जानें वजह
गया के हदहदवा पहाड़ी की तलहटी में बिपार्ड द्वारा विकसित मंथन वाटिका में करीब 200 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग हर पौधे के साथ किसी न किसी IAS अधिकारी का नाम जुड़ा है। कभी बंजर रही यह जमीन अब हरियाली से भर गई है।
गया के दो गांवों में पीने के पानी के लिए रोज चढ़ना पड़ता है 500 फीट ऊंचा पहाड़, टंकी ही सैकड़ों परिवारों का सहारा
बिहार के गया जिले के पहाड़पुर और काईचक गांव में भूजल खारा होने के कारण लोग पीने के पानी के लिए रोजाना करीब 500 फीट ऊंचे पहाड़ पर चढ़कर टंकी से पानी भरते हैं। सक्षम परिवार बंद जार का पानी खरीदकर काम चलाते हैं।