बिहार का दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय बना कृषि शिक्षा का नया हब, करियर के खुल रहे हैं शानदार रास्ते करियर 15 घंटे पहले 3
गया स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में कृषि की पढ़ाई करने के बाद छात्र सरकारी नौकरी से लेकर अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करने तक के कई विकल्प पा सकते हैं।

कृषि के क्षेत्र में करियर का बेहतरीन विकल्प

बिहार के गया जिले में स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) वर्तमान में कृषि शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। यह संस्थान न केवल बिहार, बल्कि देश भर के उन विद्यार्थियों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है जो आधुनिक कृषि, शोध, कृषि आधारित उद्यमिता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना चाहते हैं। सबौर और पूसा के बाद, यह राज्य का एक प्रमुख सरकारी संस्थान है जहां कृषि पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है।

पाठ्यक्रम और दाखिला प्रक्रिया

इस विश्वविद्यालय में वर्ष 2023 से कृषि विषयों की पढ़ाई शुरू की गई है। यहां छात्र अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक स्तर पर प्रवेश ले सकते हैं। दाखिले की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA द्वारा आयोजित CUET परीक्षा के माध्यम से पूरी की जाती है। सबसे खास बात यह है कि इसी शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय ने कृषि में स्नातकोत्तर यानी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी शुरू कर दी है, जिससे उच्च शिक्षा के इच्छुक विद्यार्थियों को भी लाभ मिल रहा है। स्नातक पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करते हैं, जिससे उन्हें जमीनी हकीकत समझने और वहां की तकनीक के बारे में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।

विशेषज्ञों की राय और करियर के अवसर

स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड डेवलपमेंट के डीन, प्रोफेसर डॉक्टर अवनीश कुमार सिंह का मानना है कि कृषि के क्षेत्र में संभावनाओं का अंबार है। उनके अनुसार, इस विषय की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए करियर की राहें बहुत चौड़ी हैं। वे निम्नलिखित क्षेत्रों में अपने लिए उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं:

  • सरकारी सेवा: छात्र कृषि पदाधिकारी और उद्यान पदाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त हो सकते हैं।
  • बैंकिंग और प्रबंधन: बैंकिंग सेक्टर में फील्ड ऑफिसर के पद पर कार्य करने का अवसर मिलता है।
  • प्रशासनिक सेवाएं: UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के माध्यम से भी छात्र अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
  • शिक्षण और शोध: विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर या लेक्चरर के रूप में करियर बना सकते हैं।
  • निजी क्षेत्र: बीज उत्पादन करने वाली कंपनियों और रासायनिक खाद कारखानों में विशेषज्ञ की भूमिका निभा सकते हैं।
  • स्टार्टअप और उद्यमिता: स्वयं का कृषि स्टार्टअप शुरू कर रोजगार प्रदाता बन सकते हैं।

व्यावहारिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय का जोर केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। यहां विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों का गहरा अनुभव कराया जाता है। पाठ्यक्रम के अंतर्गत फसल उत्पादन, मृदा विज्ञान, बागवानी, कृषि अर्थशास्त्र, जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, कृषि इंजीनियरिंग और कृषि व्यवसाय जैसे विषयों का वैज्ञानिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। यह शिक्षा विद्यार्थियों को बदलते परिवेश के अनुसार खुद को ढालने और कृषि क्षेत्र में नए नवाचार लाने के लिए तैयार करती है, जिससे वे भविष्य में देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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