गया: शिक्षिका गुड्डी कुमारी का अनोखा तरीका, चॉकलेट और स्कूटी की सवारी से स्कूल आने को मचलते हैं बच्चे बिहार एक घंटा पहले 4
बिहार के गया जिले की एक शिक्षिका ने अपनी मेहनत और नवाचार से सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी है। अब उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

शिक्षक दिवस पर मिलेगा बड़ा सम्मान

बिहार के गया जिले के डोभी प्रखंड में स्थित मध्य विद्यालय बहेराडीह में शिक्षा की अलख जगाने वाली प्रभारी प्रधानाध्यापिका गुड्डी कुमारी को राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना में आयोजित एक विशेष राज्य स्तरीय समारोह के दौरान प्रदान किया जाएगा। सुदूर इलाके के एक सामान्य सरकारी स्कूल से जुड़ी शिक्षिका का इस पुरस्कार के लिए चयन होना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए गौरव का विषय है।

शून्य से शिखर तक का सफर

गुड्डी कुमारी के लिए यह उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। उन्होंने वर्षों तक विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव में स्कूल को संवारने का कठिन कार्य किया है। वर्ष 2007 में जब वह पहली बार इस विद्यालय में नियुक्त होकर आई थीं, तब स्कूल के पास अपना खुद का भवन तक नहीं था। उस समय कक्षाएं एक सामुदायिक भवन में संचालित की जाती थीं। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयासों से उन्होंने विभाग और सरकार का ध्यान इस ओर खींचा और आखिरकार स्कूल के लिए तीन कमरों का पक्का भवन बनवाने में सफलता हासिल की।

खेल-खेल में शिक्षा का नवाचार

गुड्डी कुमारी ने बच्चों को पढ़ाई की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई रचनात्मक तरीके अपनाए। उन्होंने टीएलएम यानी टीचिंग लर्निंग मटेरियल के निर्माण और खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा की। उन्होंने अनुशासन, रचनात्मकता और कक्षा में सक्रिय सहभागिता पर जोर दिया। शुरुआत में जब वह खेल के जरिए बच्चों को पढ़ाती थीं, तो कई अभिभावक उनका मजाक उड़ाते थे। हालांकि, समय बीतने के साथ अभिभावकों को यह समझ आया कि खेल-खेल में मिलने वाली शिक्षा बच्चों को लंबे समय तक याद रहती है। उनके इन्ही अनूठे प्रयासों के लिए उन्हें पूर्व में टीचर ऑफ द मंथ पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

स्कूटी और चॉकलेट का जादुई असर

गुड्डी कुमारी ने छात्रों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करने का एक बेहद दिलचस्प तरीका निकाला है। उन्होंने बताया कि जब वह सुबह अपने घर से स्कूल के लिए निकलती हैं, तो रास्ते में मिलने वाले पहले बच्चे को वे अपनी स्कूटी पर बैठाकर विद्यालय ले जाती हैं। स्कूल पहुंचने पर वे बच्चों को चॉकलेट देकर प्रोत्साहित करती हैं। उनके इस छोटे से प्रयास ने बच्चों के बीच स्कूल आने की होड़ लगा दी है। अब बच्चे सुबह तैयार होकर जल्दी स्कूल पहुंचने के लिए उत्सुक रहते हैं। इसके अलावा वे विद्यालय में सामूहिक गतिविधियां आयोजित करती हैं, जिससे बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया जाता है।

बढ़ती उपस्थिति और बेहतर परिणाम

शिक्षिका की मेहनत का ही नतीजा है कि आज विद्यालय में छात्रों की संख्या और उनकी उपस्थिति का ग्राफ काफी ऊपर गया है। फिलहाल मध्य विद्यालय बहेराडीह में कुल नामांकन 225 के आसपास है। इसमें से प्रतिदिन 180 से 200 बच्चे नियमित रूप से अपनी पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं। गुड्डी कुमारी मानती हैं कि संसाधनों की कमी के बावजूद यदि पूरी ईमानदारी और लगन के साथ काम किया जाए, तो शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है। राजकीय शिक्षक पुरस्कार की घोषणा के बाद से उनके परिवार, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है और उन्हें लगातार बधाईयां मिल रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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