गया के लाल सोमन राणा का कमाल: देश सेवा में गंवाया पैर, अब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखाएंगे दम खेल 2 महीने पहले 74
बिहार के गया निवासी सोमन राणा 2026 में ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। देश की सुरक्षा में अपना पैर खोने वाले सोमन ने अपनी शारीरिक बाधा को कभी भी अपनी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया।

गया के गौरव सोमन राणा का सफर

बिहार के गया जिले के रहने वाले सोमन राणा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। सोमन राणा को 2026 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। वह पैरा एथलेटिक्स स्पर्धा में देश का मान बढ़ाते हुए दिखाई देंगे। ग्लासगो में ये खेल 23 जुलाई से शुरू होकर 3 अगस्त 2026 तक चलेंगे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल उनके गृह जिले गया में, बल्कि पूरे बिहार में जश्न का माहौल है।

देश सेवा और जीवन का सबसे कठिन मोड़

44 वर्षीय सोमन राणा वर्तमान में भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका जीवन संघर्ष और साहस की एक अनूठी कहानी है। वर्ष 2006 की बात है, जब सोमन जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में एक सर्च ऑपरेशन का हिस्सा थे। इसी दौरान आतंकियों द्वारा बिछाए गए लैंड माइंस की चपेट में आने से एक भीषण विस्फोट हुआ। इस घटना में सोमन गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा। किसी भी अन्य व्यक्ति के लिए यह जीवन का अंत हो सकता था, लेकिन सोमन ने हार नहीं मानी। उपचार के बाद वह फिर से देश की सेवा के लिए अपने कैंप में लौट आए थे।

खेल को बनाया नई पहचान

एक पैर खोने के बाद भी सोमन राणा ने कभी खुद को लाचार नहीं समझा। उन्होंने अपनी वीरता का परिचय देते हुए खेल की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाई। वह आज भारत के प्रमुख सीटिंग पैरा शॉट पुट थ्रो खिलाड़ी माने जाते हैं। सोमन बताते हैं कि बचपन में उनकी खेल में कोई विशेष रुचि नहीं थी और वह पढ़ाई के साथ-साथ अपने माता-पिता के साथ खेती के कार्यों में हाथ बंटाते थे। उनका खेल सफर तब शुरू हुआ जब 2012 में उनकी मुलाकात सेना के कुछ पैरा खिलाड़ियों से हुई। उन खिलाड़ियों ने सोमन के जोश को पहचाना और उन्हें पैरा एथलीट बनने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सोमन ने पुणे स्थित आर्मी पैरालंपिक नोड में प्रशिक्षण प्राप्त किया और आज वह वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

सफलता की लंबी फेहरिस्त

सोमन राणा की उपलब्धियों का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। उन्होंने 2023 में चीन में आयोजित एशिया पैरालंपिक गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद 2025 में हुए खेलो इंडिया गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर सभी को प्रभावित किया। वहीं, 2024 के पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और पांचवां स्थान हासिल किया था। अब उनकी निगाहें ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक पर टिकी हैं।

एक साधारण परिवार से सेना तक का सफर

सोमन राणा का संबंध गया के लक्खीबाग मोहल्ले से है। उनके पिता सोन बहादुर राणा एक किसान हैं। एक साधारण किसान परिवार में पले-बढ़े सोमन के घर की आर्थिक स्थिति संघर्षपूर्ण थी। सोमन ने अपनी शुरुआती शिक्षा गया से ही पूरी की थी। उनके पिता का सपना था कि बेटा पढ़-लिखकर एक सरकारी नौकरी हासिल करे, हालांकि उन्होंने कभी सोमन पर किसी विशेष क्षेत्र में जाने का दबाव नहीं बनाया। अपनी मेहनत के दम पर सोमन ने सेना में सिपाही के पद पर अपनी जगह बनाई और आज वह अपनी कड़ी मेहनत और जज्बे के बल पर राष्ट्रमंडल खेलों के मंच तक पहुंचे हैं।

विवेक शर्मा पाबना के खेल संवाददाता हैं, जो क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों की खबरें कवर करते हैं। मैचों के विश्लेषण, खिलाड़ियों की उपलब्धियों और टूर्नामेंट्स पर उनकी गहरी पकड़ है। वे खेल प्रेमियों के लिए हर बड़ी खबर तेजी और सटीकता के साथ लाते हैं।

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