गया का तेतर डैम: दो पहाड़ों के बीच छिपा है प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना, मानसून में खिल उठती है वादियों की रौनक बिहार एक महीने पहले 59
बिहार के गया जिले में स्थित तेतर डैम अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए चर्चा में रहता है। यह डैम गंगा जल आपूर्ति योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और मानसून के दौरान इसकी छटा देखते ही बनती है।

गया की गोद में बसा एक प्राकृतिक नगीना

बिहार के गया जिले में यदि आप प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो अतरी-जेठियन मार्ग पर स्थित तेतर डैम एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आता है। गया शहर से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान दो विशाल पहाड़ों के बीच एक अनोखी घाटी में बसा हुआ है। यह इलाका न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यद्यपि आधिकारिक रूप से यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है और पर्यटकों के लिए इसे एक सार्वजनिक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं खोला गया है, फिर भी लोग इसके आसपास के ऊंचे पहाड़ों पर चढ़कर इस डैम की अद्भुत खूबसूरती को निहारने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। लोग यहां के मनमोहक नजारों को अपने कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

गंगा जल आपूर्ति योजना का प्रमुख हिस्सा

तेतर डैम की भौगोलिक स्थिति और इसके निर्माण के पीछे का उद्देश्य इसे बेहद खास बनाता है। यह प्रसिद्ध गंगा जल आपूर्ति योजना का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे मुख्य रूप से गंगा जल उद्भव योजना के तहत विकसित किया गया है। इस योजना के माध्यम से मोकामा से पाइपलाइन के जरिए गंगा नदी के पानी को इस विशाल जलाशय तक पहुंचाया जाता है और फिर उसे यहां संग्रहित किया जाता है। यह जल भंडार न केवल जल प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह गया और बोधगया के निवासियों के लिए शुद्ध पेयजल का प्राथमिक स्रोत भी है। यहां जल को शुद्ध करने की प्रक्रिया के बाद इसे पाइपलाइन के जरिए स्थानीय लोगों के घरों तक भेजा जाता है, जो इन शहरों की प्यास बुझाने का काम करता है।

मानसून में निखरता है सौंदर्य

तेतर डैम का सौंदर्य बरसात के मौसम में अपने चरम पर होता है। चारों तरफ फैली हरियाली, पहाड़ों के बीच से गुजरते बादल और डैम का शांत जल मिलकर एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत करते हैं जो किसी का भी दिल जीत सकता है। जो लोग एक बार इस शांत और सुकून भरे वातावरण में पहुंच जाते हैं, वे बार-बार यहां आने की इच्छा रखते हैं। गेहलौर घाटी से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान अपनी प्राकृतिक शांति और सुरम्य वातावरण के लिए जाना जाता है। गहलोर से जेठियन, तपोवन या राजगीर की यात्रा करने वाले राहगीर अक्सर यहां रुककर इस प्राकृतिक स्थल का दीदार करना पसंद करते हैं।

धार्मिक और आध्यात्मिक शांति

तेतर डैम केवल तकनीकी या प्राकृतिक महत्व का ही स्थान नहीं है, बल्कि यहां का परिवेश आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है। डैम के ठीक नीचे एक प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसके पास एक विशाल बरगद का पेड़ है। यह स्थान स्थानीय लोगों के बीच पूजा-पाठ के लिए काफी प्रसिद्ध है। लोग अक्सर यहां आकर बरगद के पेड़ की छाया में बैठकर घंटों शांति से समय बिताना पसंद करते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए एक आदर्श आश्रय स्थल है जो भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ पल अपने साथ या ईश्वर के साथ बिताना चाहते हैं। सुरक्षा कारणों से जनता के लिए इसके भीतर प्रवेश वर्जित होने के बावजूद, इसके आसपास की ऊंची पहाड़ियां इसे एक अनूठा पर्यटन अनुभव प्रदान करती हैं, जो हर साल मानसून में अपनी प्राकृतिक छटा से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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