उपनाम: बलूचिस्तान
पाकिस्तान की हुडा जेल में बलूच नेताओं का 9 दिनों से प्रदर्शन, न्यायिक प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
क्वेटा की जेल में बंद बलूच यकजेहती कमेटी के नेता फेसलेस ट्रायल और मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में लगातार नौवें दिन धरने पर बैठे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर पलटवार, 'फितना अल-हिंदुस्तान' को बताया सरकारी प्रायोजित झूठ
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर हुई बैठक में भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया और 'फितना अल-हिंदुस्तान' शब्द को धार्मिक जामा पहनाकर फैलाया जा रहा सरकारी दुष्प्रचार करार दिया।
बलूचिस्तान में एक ही दिन तीन बलूच संगठनों के हमले, मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी समेत कई पाकिस्तानी सैनिक ढेर
बलूचिस्तान में एक ही दिन हुए अलग-अलग हमलों में बलूच लड़ाकों ने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी समेत कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने का दावा किया है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार तीन अलग-अलग बलूच गुटों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया।
पाकिस्तान में भड़का असंतोष: मौलाना फजल-उर-रहमान का सेना पर हमला, भारत से रिश्तों पर शहबाज सरकार को फटकार
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) प्रमुख मौलाना फजल-उर-रहमान ने सेना, सत्ता प्रतिष्ठान और सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि स्वात से बलूचिस्तान तक कई सैन्य अभियानों के बावजूद आतंकवाद थमा नहीं है। उन्होंने देश की सुरक्षा, विदेश और राजनीतिक नीति को विफल करार दिया।
बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, क्वेटा ट्रेन हमले में शामिल 17 आतंकवादी ढेर
क्वेटा में पिछले सप्ताह शटल ट्रेन पर हुए बम हमले के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलूचिस्तान के कई जिलों में खुफिया अभियान चलाकर 17 आतंकवादियों को मार गिराया। इस हमले में तीन सुरक्षाकर्मियों समेत कम से कम 16 लोगों की जान गई थी।
क्वेटा ट्रेन धमाके के बाद बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की बड़ी कार्रवाई, 17 लोगों को मार गिराने का दावा
क्वेटा ट्रेन ट्रैक धमाके के बाद पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान के कई जिलों में अभियान चलाकर 17 लोगों को मार गिराने का दावा किया है। वहीं छापेमारी के दौरान कम से कम 10 नागरिकों को कथित तौर पर जबरन हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया है।
बलूचिस्तान: 77 वर्षों की पीड़ा, 2.5 लाख जानें, 40 हज़ार लापता और 10 लाख विस्थापित
बलूचिस्तान की 77 साल लंबी दास्तान मौत, कथित अपहरण, विस्थापन और संसाधनों के दोहन की कहानी है, जहाँ हज़ारों परिवार आज भी अपने प्रियजनों के लौटने की राह देख रहे हैं।