पाकिस्तान जल रहा है: खैबर पख्तूनख्वा से बलूचिस्तान तक सरकारी नियंत्रण खत्म, मौलाना फजलुर रहमान ने खोली पोल विश्व 2 घंटे पहले 6
पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता मौलाना फजलुर रहमान ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के बड़े हिस्सों से सरकार की पकड़ पूरी तरह छूट चुकी है। उन्होंने देश की तुलना एक जलते हुए घर से करते हुए सरकार को चेताया है।

पाकिस्तान की बदहाली और मौलाना फजलुर रहमान का बड़ा दावा

पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक चेहरे और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने मुल्क के मौजूदा सुरक्षा हालातों पर एक ऐसा विस्फोटक बयान दिया है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने पाकिस्तान की स्थिति को एक जलते हुए घर की संज्ञा दी है। मौलाना का कहना है कि आज पाकिस्तान के अंदरूनी हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सरकार को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। उनके अनुसार, जब घर आग की लपटों में घिरा हो, तो यह बहस करना निरर्थक है कि घर का बंटवारा कैसे होगा, बल्कि सबसे पहले उस आग को बुझाने का प्रयास होना चाहिए।

खैबर पख्तूनख्वा में सरकारी रिट का अंत

मौलाना फजलुर रहमान के दावों के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा का एक बड़ा हिस्सा अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि सिंधु नदी के पश्चिमी इलाकों में पाकिस्तानी हुकूमत की साख और पकड़ नाममात्र की रह गई है। वहां की सुरक्षा व्यवस्था का आलम यह है कि सेना और पुलिस अपनी प्रभावशीलता खो चुके हैं। मौलाना ने लक्की मरवत, बन्नू और टैंक जैसे संवेदनशील इलाकों का विशेष रूप से उल्लेख किया। इन जगहों पर पुलिस प्रशासन का ढांचा पूरी तरह लड़खड़ा गया है, जहां निचले स्तर के पुलिसकर्मी अब DPO, DIG और IG जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने लगे हैं।

पुलिस के भीतर समानांतर व्यवस्था का आरोप

मौलाना फजलुर रहमान ने पुलिस महकमे के भीतर पनप रही अराजकता पर भी चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इलाकों में पुलिस ने अपने स्वयं के सुरक्षा घेरे, चौकियां और समितियां बना ली हैं। पारंपरिक कमांड सिस्टम टूट रहा है और स्थानीय स्तर पर मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने हंगू की एक घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक पुलिस परिसर को तालिबान ने पूरी तरह घेर लिया था। स्थानीय उलेमाओं के हस्तक्षेप के बाद ही वहां फंसे पुलिसकर्मियों को बाहर निकाला जा सका। इस दौरान हथियार सरेंडर करने और पैसे देकर जान बचाने जैसी अपमानजनक स्थितियां सामने आईं, जो राज्य की विफलता को दर्शाती हैं। कुर्रम और ओरकजई जैसे क्षेत्रों में भी सरकार की मौजूदगी केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।

बलूचिस्तान में सेना की सिमटती ताकत

केवल खैबर पख्तूनख्वा ही नहीं, बल्कि बलूचिस्तान के हालात भी मौलाना फजलुर रहमान के निशाने पर रहे। उन्होंने कहा कि मस्तुंग, खुज़दार और चागाई जैसे इलाकों में सेना और सुरक्षा बलों का ध्यान केवल जिला मुख्यालयों और शहरों तक सिमट कर रह गया है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के नाम पर शहरों के चारों ओर खाइयां खोदी जा रही हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों, खेतों और गांवों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। बलूचिस्तान के विशाल भू-भाग में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है।

सरकार की निष्क्रियता पर उठे सवाल

मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार की रणनीति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आश्चर्य जताया कि जब पूरे पश्तून बेल्ट और बलूचिस्तान में सरकारी नियंत्रण को खुली चुनौती दी जा रही है, तब भी सरकार किसी भी बड़े कदम को उठाने में नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों को नसीहत दी कि राजनीतिक दांव-पेच और प्रशासनिक उठापटक के बजाय, उन्हें राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता पर ध्यान देना चाहिए। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते इन सुलगते हुए मुद्दों को हल नहीं किया गया, तो पाकिस्तान को और भी भयावह परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। मौलाना के ये दावे पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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