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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान में बलूच लड़ाकों की घेराबंदी
बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना और सरकारी प्रतिष्ठानों के खिलाफ अपने हमलों में तेजी ला दी है। इन हमलों के कारण पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है। हालिया घटनाओं में बलूच लड़ाकों ने न केवल सेना की चौकियों को निशाना बनाया है, बल्कि बिजली के बुनियादी ढांचे को भी नष्ट कर दिया है। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
बोलान में सेना की चौकी पर घातक हमला
यूनाइटेड बलूच आर्मी ने बलूचिस्तान के बोलान इलाके में एक सैन्य चेकपोस्ट को अपना निशाना बनाया है। इस हमले के बारे में संगठन के प्रवक्ता मजार बलूच ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को दरज बीट स्थित पाकिस्तानी सेना की चौकी पर रिमोट नियंत्रित विस्फोटक के जरिए धमाका किया गया। संगठन का दावा है कि इस जोरदार हमले में चार पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए और एक जवान गंभीर रूप से घायल हुआ। बलूच लड़ाकों का कहना है कि वे काफी समय से दरज बीट और पंजरा ब्रिज चेकपोस्ट के बीच पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे और उनके काफिलों की आवाजाही की टोह ले रहे थे।
बिजली टावरों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान
बलूचिस्तान में बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने भी बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया है। संगठन के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच के अनुसार, मंगलवार रात को नसीराबाद जिले के चत्तर क्षेत्र में दो 220 केवी बिजली टावरों को विस्फोटकों का उपयोग करके उड़ा दिया गया। इस हमले से बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे पहले, 9 अगस्त को भी इसी समूह ने कच्छी जिले के धादर इलाके में एक सरकारी कृषि कार्यालय को विस्फोटक लगाकर ध्वस्त कर दिया था। संगठन ने तर्क दिया कि इस कार्यालय का उपयोग बलूचिस्तान के कृषि संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाली साजिशों के लिए किया जा रहा था।
बीएलए ने किया 38 हमलों का दावा
इस सप्ताह की शुरुआत में बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और विस्तार देते हुए 38 हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। संगठन के दावों के मुताबिक, इन अलग-अलग हमलों के दौरान 32 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी और उनके सहयोगी मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन भीषण हमलों और मौतों की संख्या को लेकर पाकिस्तानी आधिकारिक सूत्रों की ओर से अभी तक कोई भी स्पष्ट प्रतिक्रिया या स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार, ये घटनाएं पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे अशांति के संकेतों को प्रदर्शित करती हैं।
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