पाकिस्तान में जनरल असीम मुनीर के लिए बढ़ी मुसीबत, जेल में बंद इमरान खान से जुड़ा संकट गहराया विश्व 2 घंटे पहले 5
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर वर्तमान में एक दोहरे संकट से घिरे हैं, जहाँ एक ओर इमरान खान की जेल में कैद समर्थकों में गुस्सा बढ़ा रही है, वहीं उनकी रिहाई सेना की सत्ता के लिए चुनौती साबित हो सकती है।

पाकिस्तान के सामने चौतरफा चुनौतियां

इस समय पाकिस्तान का परिदृश्य बेहद चिंताजनक बना हुआ है। बलूचिस्तान के भीतर बढ़ती हिंसा, कबायली क्षेत्रों में अशांति और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में व्याप्त असंतोष ने सरकार की नींव हिला दी है। इन सबके ऊपर देश की गंभीर आर्थिक बदहाली ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। इसी अस्थिरता के बीच पाकिस्तान की राजनीति का केंद्र बिंदु पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान बने हुए हैं, जो काफी समय से सलाखों के पीछे हैं। उनके खिलाफ दर्ज दर्जनों कानूनी मामले अब देश के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के लिए एक जटिल राजनीतिक पहेली बन गए हैं।

इमरान खान और कानूनी उलझनें

इमरान खान पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुख्य मामलों में तोशाखाना, अल-कादिर ट्रस्ट और उनकी पत्नी बुशरा बीबी से जुड़े विवाद शामिल हैं। विशेष रूप से अल-कादिर ट्रस्ट मामले में उन पर आरोप है कि ब्रिटेन से पाकिस्तान हस्तांतरित की गई भारी-भरकम राशि में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं। हालांकि, इमरान खान और उनकी पार्टी के समर्थक इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि यह सब केवल राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है। समर्थक अक्सर उनकी ओर से किए गए परोपकारी कार्यों का भी उल्लेख करते हैं, जिनमें शौकत खानम कैंसर अस्पताल, नमल यूनिवर्सिटी और इमरान खान फाउंडेशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इसके विपरीत, विरोधियों का तर्क है कि कोई भी सामाजिक कार्य किसी व्यक्ति को देश के कानून से ऊपर नहीं बना सकता है।

सेना प्रमुख के लिए दोहरी दुविधा

जनरल असीम मुनीर की स्थिति 'आगे कुआं और पीछे खाई' वाली हो गई है। अगर इमरान खान को जेल से रिहा किया जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह भारी जनसमर्थन के साथ मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय होकर सेना के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर देंगे। वहीं दूसरी ओर, यदि उन्हें लंबे समय तक कैद में रखा जाता है, तो जनता और उनके समर्थकों में पनप रहा गुस्सा एक बड़े विद्रोह का रूप ले सकता है। मुनीर के लिए दोनों ही स्थितियां अत्यंत जोखिम भरी और अनिश्चितताओं से भरी हैं।

साल 2023 के घटनाक्रम और बिगड़े हालात

पाकिस्तान में सेना और नेताओं के बीच टकराव का इतिहास पुराना है, लेकिन मई 2023 की घटनाओं ने इस दरार को और चौड़ा कर दिया है। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में जो हिंसक प्रदर्शन हुए, उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। प्रदर्शनकारियों द्वारा लाहौर में कोर कमांडर के निवास समेत कई सैन्य प्रतिष्ठानों और आईएसआई से संबंधित ठिकानों को निशाना बनाना सेना के लिए कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं था। इस घटनाक्रम के बाद इमरान खान और उनके समर्थकों पर आतंकवाद के साथ-साथ अन्य संगीन धाराओं में कार्रवाई तेज कर दी गई। वर्तमान में देश की आर्थिक स्थिति और क्षेत्रीय अस्थिरता ने जनरल असीम मुनीर के लिए इमरान खान के मुद्दे को संभालना और भी कठिन बना दिया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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