बलूचिस्तान में आसिम मुनीर की एयरस्ट्राइक का खौफनाक बदला, गृह मंत्री के काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग विश्व एक घंटा पहले 2
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एयरस्ट्राइक के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं और मस्तुंग जिले में बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लांगो पर हुए जानलेवा हमले ने प्रशासन की नींव हिला दी है।

आसिम मुनीर की एयरस्ट्राइक का तीखा जवाब

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने शायद यह कल्पना भी नहीं की होगी कि बलूचिस्तान में उनके द्वारा करवाई गई एयरस्ट्राइक का परिणाम इतना भयावह होगा। मुनीर का मानना था कि हवाई हमलों से बलूचिस्तान की जनता और बागी गुट डर जाएंगे, लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ गया है। 28 निर्दोष लोगों की मौत के बाद बलोच युवाओं का आक्रोश कई गुना बढ़ गया है। मस्तुंग जिले में हाल ही में घटी एक घटना ने इस बदले की आग की तीव्रता को साफ तौर पर दिखा दिया है, जहाँ बलूचिस्तान के गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लांगो के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। हालांकि, इस हमले में मंत्री बाल-बाल बच गए हैं, लेकिन उन्हें बचाने के चक्कर में सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी है।

मस्तुंग में हुई खौफनाक वारदात

इस्लामाबाद के गलियारों में इस हमले की गूँज सुनाई दे रही है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने घटना के विवरण साझा करते हुए बताया कि गृह मंत्री जियाउल्लाह लांगो का काफिला मस्तुंग के बेहद संवेदनशील और खतरनाक इलाके से गुजर रहा था, तभी उन पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुरक्षा में लगे पुलिस जवान वहां से जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर हो गए। इस हमले ने रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय तक हलचल पैदा कर दी है, और यह संदेश स्पष्ट है कि बलोच विद्रोही अब किसी भी सूरत में पीछे हटने वाले नहीं हैं।

हमले में घायल हुए पुलिसकर्मी

आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस जबरदस्त शूटआउट में कुल 6 लोग घायल हुए हैं। राहत की बात केवल इतनी रही कि गृह मंत्री सुरक्षित बच गए और हमले के तुरंत बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच क्वेटा वापस लाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों को गोलियां लगी हैं, उनमें से 3 पुलिस के जवान हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि घायलों में से 2 पुलिसकर्मियों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। सभी घायलों को इलाज के लिए क्वेटा के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने की जद्दोजहद में जुटी है।

सत्ता के गलियारों में लांगो का रसूख

मीर जियाउल्लाह लांगो को पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति का एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है। वह केवल बलूचिस्तान के गृह मंत्री ही नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की केंद्र सरकार के प्रमुख सहयोगी और समर्थक भी हैं। लांगो 'बलूचिस्तान आवामी पार्टी' (BAP) के वरिष्ठ नेता हैं। बलूचिस्तान में वर्तमान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP), पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और BAP की गठबंधन सरकार चल रही है। इस्लामाबाद में शहबाज सरकार को भी BAP का पूरा समर्थन हासिल है। इस नाते, लांगो को पाकिस्तानी सेना के जनरलों और सत्ता के शीर्ष नेतृत्व का बेहद करीबी और भरोसेमंद साथी माना जाता है।

खद कोचा हाईवे: हिंसा का केंद्र

मस्तुंग का 'खद कोचा' इलाका इन दिनों पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। यह क्षेत्र एक ऐसे युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया है जहाँ पिछले 1 महीने के भीतर यह चौथा बड़ा हमला है। जिस हाईवे पर यह काफिला हमले का शिकार हुआ, उसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद असुरक्षित माना जाता है। इससे पहले हुए हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना ने बड़े-बड़े दावे किए थे और इलाके में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाने की बात कही थी, लेकिन हालिया हमले ने उन सभी दावों की पोल खोल दी है। हमलावरों ने सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए सूबे के गृह मंत्री को ही निशाना बना लिया।

तेज हुई घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन

गृह मंत्री पर हुए इस हमले के बाद पाकिस्तानी प्रशासन और सेना में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में मस्तुंग और खद कोचा इलाके को सील कर दिया गया है। हमलावरों को पकड़ने के लिए सेना ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • रास्तों की नाकेबंदी: हाईवे को सभी दिशाओं से ब्लॉक कर दिया गया है ताकि हमलावर भाग न सकें।
  • सर्च ऑपरेशन: आस-पास के जंगलों और दुर्गम इलाकों में सेना का व्यापक तलाशी अभियान जारी है।
  • हाई अलर्ट: क्वेटा और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में चौकसी बढ़ा दी गई है और सुरक्षा बलों को मुस्तैद रहने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि, अभी तक किसी भी संगठन ने आधिकारिक रूप से इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन जिस तरह से हमले को अंजाम दिया गया है, उससे सुरक्षा एजेंसियों की नजरें बलूच लिबरेशन आर्मी की तरफ हैं।

बलूचिस्तान में आखिर क्यों सुलग रही है आग?

पाकिस्तान सरकार के विरुद्ध बलूचिस्तान में बढ़ता गुस्सा कोई आकस्मिक घटना नहीं है। यह क्षेत्र प्राकृतिक गैस, बहुमूल्य खनिजों और संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन विडंबना यह है कि यहाँ की जनता घोर बदहाली और गरीबी में जी रही है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि इस्लामाबाद और पंजाब प्रांत के नेता उनके हक के संसाधनों की लूट कर रहे हैं। साथ ही, चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट CPEC को लेकर भी वहां के नागरिकों में भारी असंतोष व्याप्त है। यही मुख्य कारण है कि बागी समूह लगातार सरकारी प्रतिष्ठानों, पुलिस और सेना पर हमले कर रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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