पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें: पीओके में अवामी एक्शन कमिटी ने फौज के खिलाफ हथियार उठाने का किया एलान विश्व एक घंटा पहले 3
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले 71 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन ने अब हिंसक मोड़ ले लिया है, जहां जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

पीओके में बगावत की आग और सेना को दो टूक जवाब

पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में भड़की बगावत की लपटें अब और भी तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के निवासियों ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को चेतावनी दी है कि वे अब जुल्म के आगे घुटने नहीं टेकेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सरकार और फौज बातचीत के बजाय गोलियों का इस्तेमाल जारी रखेगी, तो कश्मीर के लोग भी चुप नहीं बैठेंगे। अब पाकिस्तानी सेना को उनकी ही भाषा में जवाब देने के लिए हथियार उठाने का एलान कर दिया गया है। गौरतलब है कि पीओके में पिछले 71 दिनों से लगातार प्रदर्शन चल रहे हैं और हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं। इस दौरान पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन आम जनता अपने हक के लिए अडिग है।

पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की चेतावनी

विरोध प्रदर्शन की कमान संभाल रही जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी ने सरकार के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया है। कमिटी का स्पष्ट कहना है कि अब पीओके की जनता न तो सरकार को टैक्स देगी और न ही बिजली का बिल भरेगी। इसके अलावा सरकारी स्कूलों और दफ्तरों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा। कमिटी ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि आसिम मुनीर की सेना निहत्थे और बेगुनाह लोगों पर गोलियां बरसाती रही, तो इसके जवाब में अब पाकिस्तानी फौजियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और उनकी लाशें गिरती नजर आएंगी।

अपने हक की लड़ाई खुद लड़ने का संकल्प

पीओके के निवासियों का आरोप है कि शहबाज शरीफ की सरकार सेना के दम पर आवाम का दमन कर रही है। महिलाओं और मासूम बच्चों की हत्याएं हो रही हैं, लेकिन पाकिस्तान की अदालतों से लेकर यूनाइटेड नेशन्स जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मुद्दे पर पूरी तरह से खामोश हैं। किसी को भी पीओके की जनता का दर्द दिखाई नहीं दे रहा है। इसी कारण अब अवाम ने तय किया है कि वे बाहरी मदद की उम्मीद छोड़ अपने अधिकारों की रक्षा खुद करेंगे और अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।

पाकिस्तान के अस्तित्व पर मंडराता खतरा

पीओके के बिगड़ते हालात केवल एक अलग घटना नहीं हैं, बल्कि यह पूरे पाकिस्तान में फैल रही अस्थिरता का हिस्सा है। बलूचिस्तान में पहले से ही आजादी की मांग को लेकर बगावत चल रही है, जहां के लोगों ने अपने इलाके को अलग मुल्क तक घोषित कर दिया है। इसके साथ ही खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत में भी हालात काफी तनावपूर्ण हैं। इन सभी क्षेत्रों में लोग सरकार और सेना के अत्याचारों के खिलाफ हथियार उठा चुके हैं। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है और देश के कई टुकड़ों में बंटने की आशंका प्रबल हो गई है।

गुलामी की मानसिकता और शहबाज शरीफ का रुख

एक तरफ देश बिखर रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पा रहा है। आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी पाकिस्तान की नीति विदेशी शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है। हाल ही में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ की। शहबाज ने खुले मंच से कहा कि वे डोनाल्ड ट्रंप के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम सुनिश्चित कर लाखों लोगों की जान बचाई। उन्होंने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करने की उम्मीद भी जताई है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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