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2 घंटे पहले
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बलूचिस्तान का वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश
पाकिस्तान की शहबाज सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान की ओर से एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक खुला पत्र लिखा गया है। इस पत्र का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य सहायता और आर्थिक फंड को पूरी तरह से बंद करवाना है। यह घटनाक्रम 12 अगस्त 2026 को बलूचिस्तान के सुराब इलाके में हुए उस भीषण हवाई हमले के बाद सामने आया है, जिसमें 30 बेगुनाह लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है।
ट्रंप और जिनपिंग की भूमिका पर सवाल
इस पत्र के माध्यम से बलूचिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह बताने की कोशिश की है कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे नरसंहार में अब सीधे तौर पर वैश्विक महाशक्तियों की भूमिका संदिग्ध हो गई है। रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने ट्रंप और शी जिनपिंग को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद का इस्तेमाल बलूच नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। बलूच नेताओं का तर्क है कि सुराब नरसंहार की जो सच्चाई सामने आई है, उसे जानने के बाद चीन और अमेरिका के लिए जनरल आसिम मुनीर से जवाब तलब करना अनिवार्य हो गया है।
हथियारों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप
पत्र में विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार पाकिस्तान को मिली विदेशी सैन्य मदद का गलत उपयोग हो रहा है। बलूच प्रतिनिधियों का कहना है कि अमेरिका और चीन से मिलने वाली अरबों डॉलर की सहायता और आधुनिक लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना अपने ही नागरिकों को कुचलने के लिए कर रही है। बलूच नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि चीन और अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं लगाई, तो बलूचिस्तान में अत्याचार और भी अधिक भयावह रूप ले सकते हैं। 12 अगस्त को सुराब में हुई एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों सहित 30 लोगों की मौत के बाद बलूच नेतृत्व ने कड़े लहजे में कहा है कि पाकिस्तानी सेना अत्याधुनिक मिसाइलों और फाइटर जेट्स का इस्तेमाल निर्दोषों की हत्या के लिए कर रही है।
पाकिस्तान के झूठ की पोल
रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि पाकिस्तान की सेना ने सुराब एयरस्ट्राइक को नकार कर दुनिया के सामने फिर से झूठ बोला है। बलूच प्रतिनिधियों का मानना है कि 12 अगस्त की घटना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जाना चाहिए। पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि पाकिस्तान का इतिहास झूठ और धोखे से भरा रहा है। जिस तरह ओसामा बिन लादेन के मामले में पाकिस्तान ने जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं को बरगलाया, वही चालाकी वह आज चीन के साथ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के नाम पर कर रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि बलूचिस्तान के कई इलाकों में शाम ढलने के बाद पाकिस्तानी सेना का नियंत्रण लगभग समाप्त हो जाता है।
अमेरिकी सैन्य मदद पर आंकड़ों का खुलासा
पत्र में ट्रंप प्रशासन से पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए गए हैं:
- F-16 लड़ाकू विमान: वर्ष 1983 से 1987 के बीच 'पीस गेट I और II' प्रोग्राम के अंतर्गत अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 F-16A/B फाइटर जेट्स दिए थे।
- 5 अरब डॉलर का रक्षा पैकेज: वर्ष 2006 में अमेरिका ने 18 नए F-16C/D ब्लॉक 52 विमानों के साथ ही 34 पुराने विमानों के आधुनिकीकरण (MLU), AIM-120C मिसाइलों और इंजन सपोर्ट के लिए लगभग 5 बिलियन डॉलर के रक्षा सौदे को मंजूरी दी थी।
बलूच नेतृत्व का आरोप है कि जिन हथियारों को आतंकवाद से लड़ने के लिए दिया गया था, आज आसिम मुनीर की सेना उन्हीं का उपयोग बलूच नागरिकों के नस्लीय सफाए के लिए कर रही है।
चीन की सैन्य सहायता का काला चिट्ठा
पत्र में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 1960 के दशक से जारी सैन्य मदद का ब्यौरा देते हुए कटघरे में खड़ा किया गया है:
- शुरुआती सहायता: 1970 के दशक की शुरुआत में चीन ने 200 मिलियन डॉलर के 165 MiG-19 विमान और भारी हथियार दिए थे, जिनका उपयोग बलूच स्वतंत्रता सेनानियों को दबाने में हुआ था।
- आधुनिक तकनीक: चीन ने पाकिस्तान को F-7, A-5, K-8 जेट्स और मिसाइल सिस्टम उपलब्ध कराए, साथ ही JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों के निर्माण में तकनीकी सहयोग दिया, जो अब बलूचिस्तान पर बमबारी कर रहे हैं।
- पनडुब्बियां: वर्ष 2015 में चीन ने पाकिस्तान के साथ 8 युआन-क्लास पनडुब्बियां देने का लगभग 5 अरब डॉलर का समझौता किया था।
चीन को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वह सुनिश्चित करे कि उसकी तकनीक का उपयोग बलूचिस्तान के दमन के लिए न हो।
बलूचिस्तान की संप्रभुता का दावा
पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान का बलूचिस्तान की जमीन, उसके जल संसाधनों और हवाई क्षेत्र पर कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है। बलूच नेताओं ने दावा किया है कि पिछले कई दशकों से इस्लामाबाद विदेशी हथियारों के बल पर बलूच जनता के खिलाफ स्टेट टेररिज्म चला रहा है। पत्र में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि भविष्य में यदि चीन या अमेरिका बलूचिस्तान के संसाधनों, बंदरगाहों या खनिज संपदा में निवेश करना चाहते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान को दरकिनार कर सीधे बलूच जनता और उनके वास्तविक प्रतिनिधियों से बातचीत करनी होगी। किसी भी विदेशी शक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह एक तरफ पाकिस्तान को हथियार दे और दूसरी तरफ बलूचिस्तान की दौलत को लूटे।
दुनिया से की गई महत्वपूर्ण मांगें
पत्र के अंत में बलूचिस्तान ने दुनिया के सामने तीन प्रमुख मांगे रखी हैं:
- सैन्य सहायता पर रोक: मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तान को दी जाने वाली हर प्रकार की सैन्य आपूर्ति तुरंत रोकी जाए।
- अंतरराष्ट्रीय निगरानी: एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाए जो यह सुनिश्चित करे कि पाकिस्तान को दिए गए हथियारों का उपयोग आम नागरिकों के खिलाफ न हो।
- मान्यता: दुनिया के सभी देश बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान करें।
इस पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बलूच जनता अब किसी भी स्थिति में शांत बैठने को तैयार नहीं है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग इस चेतावनी का संज्ञान लेते हैं या पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर चुप्पी साधे रखते हैं।
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