उपनाम: आत्मनिर्भरता
बागेश्वर की महिलाओं ने पेश की मिसाल, सरकारी दफ्तरों में कैंटीन चलाकर संवारा अपना भविष्य
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में महिलाओं के एक समूह ने आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। सरकारी कार्यालयों में कैंटीन का संचालन कर ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
केरल की 3 नन की संघर्ष गाथा: बिशप के खिलाफ लड़ाई के बाद सिलाई से शुरू किया आत्मनिर्भरता का सफर
जालंधर के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ लंबी कानूनी जंग लड़ने वाली तीन नन ने विपरीत परिस्थितियों में हार मानने के बजाय सिलाई को अपना आधार बनाया और आज वे स्टैंड बाय मी क्लॉथिंग ब्रांड के जरिए एक नई पहचान बना रही हैं।
बस्तर में पुलिस की अनूठी पहल: नेतानार कैंप में सिलाई सीखकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित नेतानार पुलिस कैंप में सेवा डेरा की शुरुआत की गई है, जहाँ स्थानीय महिलाओं को निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
घर की जिम्मेदारियों ने छीना बचपन, पर नहीं डिगा हौसला: फरीदाबाद में महिलाओं की संघर्ष भरी कहानी
फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में इलेक्ट्रिक बग्घी चलाकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहीं महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हुई हैं। कम उम्र में ही घर के बोझ तले दबी इन महिलाओं ने हार न मानकर नई राह चुनी है।
सफलता की कहानी: एक गाय से शुरू किया सफर, आज सीतामढ़ी की समिता बन गईं आत्मनिर्भर
बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली समिता देवी ने केवल एक गाय के साथ पशुपालन की शुरुआत की थी, जो आज एक सफल व्यवसाय बन चुका है। अपनी सूझबूझ और मेहनत के दम पर वह हर महीने हजारों रुपये की कमाई कर रही हैं और अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं।
लखीमपुर खीरी: माया प्रेरणा समूह की राम बेटी ने बदली तकदीर, चाय-पराठे की कैंटीन से कमा रहीं हर दिन 2500 रुपये
लखीमपुर खीरी की राम बेटी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर साल 2017 में एक छोटी सी कैंटीन शुरू की थी, जो आज उनके आत्मनिर्भर बनने का जरिया बन गई है। उनकी सफलता की कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखती हैं।
बागेश्वर के बागनाथ मंदिर के पास 40 साल से दुकान चला रहीं दो महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल
उत्तराखंड के बागेश्वर में बागनाथ मंदिर के सामने पिछले 40 सालों से दुकान चला रहीं मंजू गोस्वामी और पूजा देवी अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं।
खंडवा के खेड़ी गांव में सहजन ने बदली तस्वीर, महिलाओं ने खड़ा किया लाखों का कारोबार
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खेड़ी गांव की 25 से अधिक महिलाओं ने सहजन (मोरिंगा) की खेती को सफल ग्रामीण उद्यम में बदलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
दरभंगा के नवीन ने आंगन में उगाई शुद्ध परवल, 6 महीने से नहीं गए बाजार, पूरा परिवार खा रहा ताजी सब्जी
दरभंगा के नवीन कुमार पांडे ने घर के दरवाजे की खाली जमीन पर परवल की बेल लगाई और बीते 6 महीने से उनका 10 लोगों का परिवार बिना बाजार गए ताजी, केमिकल-मुक्त परवल खा रहा है।
भरतपुर की महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल, घर पर ही बना रहीं साबुन और फिनाइल
भरतपुर जिले की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर फिनाइल, हैंडवॉश और साबुन जैसे घरेलू उत्पाद तैयार कर रही हैं और घर के कामकाज के साथ अतिरिक्त आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
मुफ्त प्रशिक्षण से संवरी जिंदगी! मुरादाबाद की इन महिलाओं ने घर बैठे शुरू किया लाखों का कारोबार, हो रही शानदार आमदनी
मुरादाबाद की महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह ने मुफ्त ट्रेनिंग के दम पर हस्तशिल्प और सिलाई-कढ़ाई का कारोबार खड़ा कर लिया है। हर महीने यह समूह लाखों रुपये की कमाई कर रहा है और हर महिला 10 से 15 हजार रुपये कमा रही है।
दादी-नानी की रेसिपी से उपजा सपना, अब फल-फूल रहा है कारोबार
रांची की 55 वर्षीय पूनम देवी ने पारंपरिक पापड़, बड़ी, चिरौरी और अचार बनाने को व्यवसाय का रूप दिया, जिनके उत्पाद अब देश-विदेश तक पहुंच रहे हैं।
देवाश्रय गौशाला: फरीदाबाद में बेजुबानों को नया जीवन और महिलाओं को रोजगार
फरीदाबाद की देवाश्रय गौशाला घायल और बेसहारा पशुओं को 24 घंटे इलाज और आश्रय देती है, साथ ही गांवों की महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही है।
वैशाली के मधुरापुर में महिलाओं ने थामी डेयरी की बागडोर, बदल रही गांव की तस्वीर
वैशाली जिले के मधुरापुर गांव की महिलाएं दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति से जुड़कर डेयरी उद्योग की कमान संभाल रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस पहल ने न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि पूरे गांव की सूरत भी बदल दी है।
अधिकारियों ने टाली समस्या, नेता रहे बेखबर — गांव वालों ने खुद खोद डाला तालाब, बन गए 'दशरथ मांझी'
पन्ना जिले के आदिवासी बहुल जैतुपुरा गांव में वर्षों के जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद न मिलने पर खुद श्रमदान और चंदे से करीब चार लाख रुपये जुटाकर तालाब बना डाला। यह सामूहिक प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है।