हरियाणा
एक घंटा पहले
3
विचारों
फरीदाबाद में अब घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को समय पर इलाज और सुरक्षित आश्रय मिलने की सुविधा मौजूद है। इस पहल से जहां एक ओर बेजुबान जानवरों की जान बच रही है, वहीं आम लोगों को भी राहत मिल रही है। सड़क पर घायल पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के साथ-साथ यह कोशिश आसपास के गांवों की महिलाओं और दिव्यांग बच्चों को रोजगार और आत्मनिर्भरता का रास्ता भी दिखा रही है। यह गौशाला सिर्फ पशुओं का ठिकाना नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और स्वावलंबन का अनोखा संगम बन चुकी है।
साल 2021 में रखी गई थी नींव
फरीदाबाद सर्वोदय हॉस्पिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर अंशु गुप्ता बताती हैं कि देवाश्रय गौशाला की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। इसका उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने किया था और उन्हीं के सहयोग से यह परियोजना आगे बढ़ी। उनके मुताबिक आज इस गौशाला में करीब 80 लोग काम कर रहे हैं।
गांव की महिलाओं को मिला काम
अंशु गुप्ता के अनुसार आसपास के गांवों की महिलाओं को यहां रोजगार दिया गया है, जिससे वे अपनी आजीविका चला रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे बताती हैं कि कई बार ऐसी घटनाएं सामने आईं जब किसी गाय के बछड़े पर वाहन चढ़ गया या कोई पशु गंभीर रूप से घायल हालत में सड़क किनारे पड़ा रहा। ऐसे मौकों पर लोगों के पास यह जानकारी ही नहीं होती थी कि किसे फोन करें और पशु तक मदद कैसे पहुंचाई जाए। इसी जरूरत को महसूस करते हुए देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल की शुरुआत की गई।
एनिमल हॉस्पिटल में हर सुविधा मौजूद
अंशु गुप्ता बताती हैं कि अस्पताल में 24 घंटे रेस्क्यू टीम, कॉल सेंटर, एम्बुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं। कहीं से भी किसी घायल या बीमार पशु की सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है और पशु को अस्पताल लाकर उसका इलाज शुरू करती है। यहां ओपीडी से लेकर सर्जरी और पुनर्वास तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
उनका कहना है कि उनका मकसद शहर में ऐसी व्यवस्था खड़ी करना है, जहां हर घायल और बीमार पशु को समय पर और उचित उपचार मिल सके। आने वाले समय में वे पशुओं के लिए एक बड़े तपोवन जैसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं, जहां जानवरों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।
350 गायों समेत करीब 400 पशुओं की देखभाल
अंशु गुप्ता के मुताबिक इस समय गौशाला में करीब 350 गायों की देखभाल की जा रही है। इनके अलावा यहां कुत्ते, बंदर और कई अन्य बेजुबान पशु भी मौजूद हैं। कुल मिलाकर लगभग 400 पशु यहां आश्रय और उपचार पा रहे हैं।
वे बताती हैं कि उनकी सोच सिर्फ पशुओं की सेवा तक सीमित नहीं है। उन्होंने यहां एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिसमें पशुओं की देखभाल के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। रेस्क्यू किए गए पशुओं को आश्रय, चारा और पानी मुहैया कराया जाता है, वहीं गाय के गोबर से कई तरह के उत्पाद भी बनाए जाते हैं।
दिव्यांग बच्चों और महिलाओं को प्रशिक्षण
अंशु गुप्ता बताती हैं कि गौशाला में दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और भविष्य में अपना काम शुरू कर सकें। साथ ही आसपास के गांवों की महिलाओं को भी प्रशिक्षित किया जाता है। ये महिलाएं गोबर से बने उत्पाद तैयार करती हैं और इसके बदले उन्हें रोजगार मिलता है।
उनका कहना है कि उनकी कोशिश एक ऐसी इकोनॉमी तैयार करने की है, जो पशुओं के संरक्षण और रोजगार दोनों को साथ लेकर चले। गौशाला में जमा होने वाले गोबर से जैविक खाद, गोबर की लकड़ी और कई अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके अलावा यहां इको-फ्रेंडली पेंट भी तैयार किया जा रहा है। इनसे होने वाली आय पशुओं की देखभाल और उपचार पर खर्च की जाती है।
तीन एकड़ में फैली है गौशाला
अंशु गुप्ता के अनुसार यह गौशाला करीब तीन एकड़ जमीन में फैली हुई है। इसके एक हिस्से में अत्याधुनिक पशु अस्पताल है, जबकि दूसरी ओर हेल्दी विंग और गोबर आधारित उत्पाद बनाने के लिए प्लांट लगाया गया है। यहां तैयार होने वाले उत्पादों और दूसरी गतिविधियों से मिलने वाली आय का इस्तेमाल बेजुबान पशुओं की सेवा और देखभाल में किया जाता है।
Comments
0 comment