बागेश्वर के बागनाथ मंदिर के पास 40 साल से दुकान चला रहीं दो महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल उत्तराखंड 2 महीने पहले 74
उत्तराखंड के बागेश्वर में बागनाथ मंदिर के सामने पिछले 40 सालों से दुकान चला रहीं मंजू गोस्वामी और पूजा देवी अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं।

कड़ी मेहनत और पक्के इरादों की कहानी

हमारे समाज में मेहनत करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है, जो सीमित संसाधनों और कम पैसों में भी दिन-रात पसीना बहाकर अपना जीवन सम्मानपूर्वक जीते हैं। जब हम किसी बाजार या धार्मिक स्थल पर जाते हैं, तो हमें वहां कई छोटे-छोटे दुकानदार दिखाई देते हैं। ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करने के बजाय अपने शांत और निरंतर काम से अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से भी एक ऐसा ही प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जो न केवल आत्मनिर्भरता की कहानी बयां करता है, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

बागेश्वर में स्थित ऐतिहासिक और सुप्रसिद्ध बागनाथ मंदिर के ठीक सामने बैठने वाली दो महिलाएं आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ये महिलाएं हैं मंजू गोस्वामी और पूजा देवी। ये दोनों पिछले करीब 40 वर्षों से इसी स्थान पर अपनी-अपनी छोटी दुकानें चला रही हैं। इतने लंबे समय से वे लगातार अपने काम में जुटी हुई हैं और अपने परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बनी हुई हैं।

मौसम की मार भी नहीं डिगा पाती हौसला

अक्सर कहा जाता है कि जो लोग अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं, उनके लिए मौसम की परिस्थितियां कोई मायने नहीं रखतीं। मंजू गोस्वामी और पूजा देवी ने इस बात को पूरी तरह सच साबित करके दिखाया है। चाहे तपती गर्मी हो, कड़ाके की ठंड हो या फिर पहाड़ों की मूसलाधार बारिश, इन दोनों महिलाओं के कदम कभी पीछे नहीं हटते। वे रोजाना तय समय पर अपनी दुकानें खोलती हैं और पूरे सेवा भाव के साथ अपने काम में लग जाती हैं।

बागनाथ मंदिर में हर दिन भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं की इसी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर के चारों ओर पूजा सामग्री की कई दुकानें सजी रहती हैं। इन्हीं दुकानों के बीच मंजू गोस्वामी और पूजा देवी की दुकानें भी हैं, जहां वे वर्षों से पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक सामग्री बेचती हैं। इसके अलावा, वे अंतिम संस्कार से जुड़ी जरूरी वस्तुएं भी अपनी दुकानों पर उपलब्ध कराती हैं। सालों से एक ही जगह पर सेवा देने के कारण स्थानीय लोगों और दूर-दूर से आने वाले भक्तों के बीच उनकी एक खास और भरोसेमंद पहचान बन गई है।

प्रतिस्पर्धा के दौर में आपसी सहयोग की मिसाल

आज के व्यावसायिक दौर में जहां हर तरफ गलाकाट प्रतियोगिता देखने को मिलती है, वहीं इन दोनों महिलाओं के बीच का रिश्ता बेहद अनोखा और दिल को छू लेने वाला है। हालांकि मंजू और पूजा की दुकानें अलग-अलग हैं, लेकिन उनके बीच कभी भी व्यावसायिक ईर्ष्या या होड़ देखने को नहीं मिलती। इसके विपरीत, वे दोनों एक-दूसरे का पूरा ध्यान रखती हैं और आपसी सहयोग की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती हैं।

दुकानदारी के दौरान जब भी किसी एक को कोई जरूरी काम होता है या वह थोड़ी देर के लिए कहीं जाती है, तो दूसरी महिला उसकी दुकान को भी संभालती है। सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामने वाली इन महिलाओं का मानना है कि आपसी विश्वास और प्यार ही सबसे बड़ी पूंजी है। उनके अनुसार, व्यापार में प्रतिस्पर्धा से कहीं ज्यादा जरूरी एक-दूसरे की मदद करना और विश्वास बनाए रखना है, जिससे न सिर्फ काम आसान हो जाता है बल्कि मन को भी सुकून मिलता है।

घर-परिवार और बच्चों के भविष्य का सहारा

इन दोनों महिलाओं के लिए यह दुकान केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि अपने परिवार के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने का मुख्य जरिया है। मंजू गोस्वामी और पूजा देवी ने बताया कि इस छोटी सी दुकान से होने वाली कमाई से उनके घरों का रोजाना का खर्च चलता है। इसके साथ ही, उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर की अन्य आवश्यक जिम्मेदारियां भी इसी आय के दम पर पूरी हो रही हैं।

संघर्ष के इस सफर में उनके बच्चे भी उनका पूरा साथ देते हैं। जब भी बच्चों को अपनी पढ़ाई से समय मिलता है, वे दुकान पर आकर अपनी माताओं का हाथ बंटाते हैं। इससे महिलाओं को न केवल शारीरिक आराम मिलता है, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद खुशी होती है कि उनकी संतान उनकी मेहनत की कद्र कर रही है।

स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण का संदेश

मंजू गोस्वामी और पूजा देवी का यह जीवन संघर्ष यह साबित करता है कि खुद के पैरों पर खड़े होने या आत्मनिर्भर बनने के लिए किसी बहुत बड़े व्यापार या बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती। इसके लिए केवल मजबूत इरादों, अटूट हौसले और लगातार मेहनत करने की इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

बागनाथ मंदिर के सामने पिछले एक दशक से भी अधिक समय से लगातार सक्रिय रहकर काम कर रही ये दोनों महिलाएं आज बागेश्वर और उसके आसपास के इलाकों की तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी यह प्रेरक कहानी स्पष्ट संदेश देती है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो हर बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है। छोटे-छोटे प्रयास भी जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप