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2 महीने पहले
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विचारों
आत्मनिर्भरता की नई कहानी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में महिलाओं के सशक्तिकरण की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई है। यहाँ स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रही हैं, बल्कि समाज में भी अपना एक अलग मुकाम हासिल कर रही हैं। घर की चारदिवारी में रहने वाली ये महिलाएं अब बाहर निकलकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। इसी क्रम में माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा पेश की गई सफलता की मिसाल काफी प्रेरणादायक है।
साल 2017 से शुरू हुआ सफर
माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की सदस्य राम बेटी ने बताया कि उन्होंने साल 2017 में स्वयं सहायता समूह का दामन थामा था। यह उनके जीवन का एक ऐसा मोड़ था जिसने उनकी तकदीर बदल दी। शुरुआत में उन्हें समूह के संचालन, बचत करने के तरीके और आपस में मिलकर काम करने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने मेहनत और लगन से इन बारीकियों को समझा और साल 2018 में कैंटीन संचालन का काम अपने हाथों में लिया। यह निर्णय आज उनकी कमाई का मुख्य साधन बन चुका है।
सीमित संसाधनों में बड़ी कामयाबी
राम बेटी का कहना है कि काम की शुरुआत कतई आसान नहीं थी। शुरुआत में संसाधन बहुत सीमित थे, लेकिन इरादे बुलंद थे। समूह की सभी महिलाओं ने एकजुट होकर काम किया और समय के साथ धीरे-धीरे लोगों का भरोसा जीतना शुरू किया। आज स्थिति यह है कि उनकी कैंटीन में ग्राहकों का तांता लगा रहता है। बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम लोग यहां चाय और नाश्ते का स्वाद लेने रोजाना आते हैं। इस सफलता के पीछे महिलाओं की कड़ी मेहनत और आपसी तालमेल का बड़ा हाथ है।
विकास भवन में चल रही है कैंटीन
वर्तमान समय में राम बेटी की यह कैंटीन विकास भवन परिसर में स्थित है। यहाँ सुबह से लेकर शाम तक चाय, नाश्ता और स्वादिष्ट पराठों की धूम रहती है। लोग खासकर पनीर पराठा और आलू पराठा खाना पसंद करते हैं। चाय की बिक्री से भी समूह को नियमित रूप से अच्छा मुनाफा मिल रहा है। कैंटीन से हर दिन लगभग 2500 रुपये की कमाई हो रही है, जिससे समूह की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार हुआ है।
ग्यारह महिलाओं की टीम की ताकत
माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं। इन सभी महिलाओं ने अपनी जिम्मेदारियों को आपस में बांट रखा है। हर सदस्य अपने कार्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाती है। राम बेटी के अनुसार, इस समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में व्यापक बदलाव आए हैं। पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज वे खुद कमा रही हैं। उनकी कमाई से बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च, घर के जरूरी काम और भविष्य की अन्य आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं। इस आर्थिक आजादी ने उनके आत्मविश्वास को एक नई ऊंचाई दी है।
दूसरे के लिए बनीं प्रेरणा
राम बेटी का दृढ़ विश्वास है कि यदि महिलाओं को उचित मार्गदर्शन, सही प्रशिक्षण और अवसर मिले, तो वे दुनिया के किसी भी कोने में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। स्वयं सहायता समूह ने उन्हें केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि टीम के साथ मिलकर चलना, नेतृत्व करना और खुद पर भरोसा करना भी सिखाया है। आज राम बेटी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। वे अब दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
सशक्तिकरण का सफल मॉडल
ग्रामीण अंचल में स्वयं सहायता समूह अब महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरे हैं। छोटे-छोटे व्यवसायों को अपनाकर महिलाएं अब न केवल अपने परिवार की आय में इजाफा कर रही हैं, बल्कि समाज में भी उनका मान-सम्मान बढ़ रहा है। माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि 11 महिलाओं की एकजुट कोशिश किसी भी काम को एक सफल व्यवसाय में बदल सकती है। यह कैंटीन आज केवल चाय और पराठे बेचने की जगह नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं की मेहनत, संकल्प और आत्मनिर्भरता का एक जीता-जागता प्रतीक बन गई है।
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