खंडवा के खेड़ी गांव में सहजन ने बदली तस्वीर, महिलाओं ने खड़ा किया लाखों का कारोबार भारत एक महीने पहले 21
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खेड़ी गांव की 25 से अधिक महिलाओं ने सहजन (मोरिंगा) की खेती को सफल ग्रामीण उद्यम में बदलकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोटे से खेड़ी गांव की महिलाओं ने अपनी मेहनत और नए विचारों के बल पर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। जिस सहजन को कभी गांव के लोग एक साधारण पेड़ मानते थे, वही आज इन महिलाओं के लिए आमदनी का बड़ा जरिया बन चुका है।

साधारण पेड़ से आय का बड़ा स्रोत

सहजन, जिसे मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय तक गांव में उपेक्षित ही रहा। लोग इसे महज एक आम पेड़ समझते थे और इसकी असली कीमत किसी ने नहीं पहचानी थी। लेकिन खेड़ी गांव की महिलाओं ने इसी पेड़ में छिपे अवसर को परखा और इसे अपनी कमाई का आधार बना लिया।

खेती से उद्यम तक का सफर

सहजन की खेती से शुरू हुआ यह सिलसिला अब एक सफल ग्रामीण उद्यम का रूप ले चुका है। शुरुआती कदम के तौर पर शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे एक संगठित कारोबार में बदल गई, जिसने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया।

25 से अधिक महिलाएं जुड़ीं

इस उद्यम से गांव की 25 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं और सभी मिलकर अच्छी कमाई कर रही हैं। सामूहिक प्रयास और नवाचार के दम पर इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही दिशा में किया गया प्रयास पूरे गांव की तस्वीर बदल सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप