भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोटे से खेड़ी गांव की महिलाओं ने अपनी मेहनत और नए विचारों के बल पर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल कायम की है। जिस सहजन को कभी गांव के लोग एक साधारण पेड़ मानते थे, वही आज इन महिलाओं के लिए आमदनी का बड़ा जरिया बन चुका है।
साधारण पेड़ से आय का बड़ा स्रोत
सहजन, जिसे मोरिंगा के नाम से भी जाना जाता है, लंबे समय तक गांव में उपेक्षित ही रहा। लोग इसे महज एक आम पेड़ समझते थे और इसकी असली कीमत किसी ने नहीं पहचानी थी। लेकिन खेड़ी गांव की महिलाओं ने इसी पेड़ में छिपे अवसर को परखा और इसे अपनी कमाई का आधार बना लिया।
खेती से उद्यम तक का सफर
सहजन की खेती से शुरू हुआ यह सिलसिला अब एक सफल ग्रामीण उद्यम का रूप ले चुका है। शुरुआती कदम के तौर पर शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे एक संगठित कारोबार में बदल गई, जिसने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया।
25 से अधिक महिलाएं जुड़ीं
इस उद्यम से गांव की 25 से अधिक महिलाएं जुड़ चुकी हैं और सभी मिलकर अच्छी कमाई कर रही हैं। सामूहिक प्रयास और नवाचार के दम पर इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सही दिशा में किया गया प्रयास पूरे गांव की तस्वीर बदल सकता है।
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