बाजार में बिकने वाला सेब आखिर कितना पुराना है? क्या इतने पुराने फल सेहत के लिए नुकसानदेह होते हैं हिमाचल प्रदेश एक महीने पहले 65
बाजार में मई और जून के महीने में मिलने वाले सेब अक्सर 8 से 10 महीने पुराने होते हैं। जानिए ये सेब इतने लंबे समय तक कैसे ताजे बने रहते हैं और क्या इन्हें खाना सुरक्षित है।

बाजार के सेब का सच

क्या आपने कभी गौर किया है कि गर्मियों के मौसम में बाजार में मिलने वाले सेब इतने चमकदार और कड़े कैसे होते हैं? सच्चाई यह है कि मई और जून के दौरान आप जो सेब खरीद रहे हैं, वे असल में 8 से 10 महीने या कभी-कभी एक साल तक पुराने हो सकते हैं। भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण, देश के मुख्य उत्पादक राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सेब की फसल साल में केवल एक बार अगस्त से अक्टूबर के बीच तैयार होती है। यही फसल पूरे साल बाजार में आपूर्ति के रूप में उपलब्ध रहती है।

हालांकि नीलगिरी के पहाड़ी इलाकों में भी कुछ सेब पैदा होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा इतनी कम होती है कि वे देश के बड़े बाजारों तक नहीं पहुंच पाते। इस वजह से भारत में 12 महीने ताजे सेब का मिलना लगभग असंभव है। साल के केवल अगस्त, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर महीने ही ऐसे होते हैं, जब आपको पूरी तरह ताजा सेब खाने को मिलता है। नवंबर के बाद से लेकर अगले साल जुलाई तक बाजार में बिकने वाला हर लाल और चमकदार सेब कोल्ड स्टोरेज का होता है।

कोल्ड स्टोरेज का वैज्ञानिक खेल

अक्टूबर के बाद अगले साल जुलाई-अगस्त तक सेब की सप्लाई चेन बनाए रखने के लिए विशेष प्रकार के कंट्रोल्ड वातावरण वाले कोल्ड स्टोरेज का सहारा लिया जाता है। इन गोदामों में तापमान को बहुत कम रखा जाता है, लेकिन इसकी असली तकनीक ऑक्सीजन और गैसों के संतुलन में छिपी है। स्टोरेज के दौरान हवा में ऑक्सीजन का स्तर कम कर दिया जाता है और नाइट्रोजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ा दी जाती है। इस प्रक्रिया से सेब की श्वसन क्रिया बहुत धीमी हो जाती है। आसान शब्दों में कहें तो सेब एक तरह की गहरी नींद या कोमा जैसी स्थिति में चला जाता है, जिससे उसका पकना और सड़ना पूरी तरह रुक जाता है।

इन सेबों को चमकदार और नमी से भरपूर बनाए रखने के लिए उन पर खाद्य-ग्रेड मोम की एक पतली परत यानी वैक्सिंग की जाती है। यह वैक्सिंग सेब को सूखने और सिकुड़ने से बचाती है। यही कारण है कि कोल्ड स्टोरेज से बाहर आने के कई हफ्तों बाद भी सेब ताजे और आकर्षक दिखते हैं।

क्या ये पुराने सेब खाना सुरक्षित है?

यह एक बड़ा सवाल है कि इतने महीने पुराना फल सेहत के लिए कैसा है? विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक स्टोरेज में रहने के कारण सेब में मौजूद विटामिन, विशेष रूप से विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा में थोड़ी कमी जरूर आती है। हालांकि, सेब का फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

कोल्ड स्टोरेज में रखे गए सेब का डाइजेस्टिव फाइबर 100 प्रतिशत सुरक्षित होता है, जो कब्ज दूर करने और पेट साफ रखने में प्रभावी है। इसी तरह कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले गुण और पोटैशियम जैसे तत्व इसमें बने रहते हैं। सेवन करने से पहले बस एक सावधानी बरतनी चाहिए कि सेब को गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लिया जाए, ताकि ऊपर लगी वैक्स की परत और धूल-मिट्टी पूरी तरह साफ हो जाए।

विदेशी सेब का विकल्प

अगर आप गर्मियों के दौरान बिल्कुल ताजा फल खाना चाहते हैं, तो बाजार में उपलब्ध विदेशी सेब एक विकल्प हो सकते हैं। मार्च से मई के बीच न्यूजीलैंड, चिली, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में सेब का सीजन होता है। ये सेब स्थानीय कोल्ड स्टोरेज वाले सेबों से थोड़े महंगे जरूर होते हैं, लेकिन ये पुराने नहीं होते।

विदेशी सेब पेड़ से तोड़े जाने के बाद लगभग 35 से 45 दिनों के भीतर बाजार तक पहुंचते हैं। न्यूजीलैंड जैसे देशों से ये सेब समुद्री मार्ग से रीफर कंटेनर्स में आते हैं। इन कंटेनर्स में भी तापमान और ऑक्सीजन नियंत्रित रहती है, जिससे फल अपनी ताजगी बरकरार रखते हैं। कस्टम क्लीयरेंस और परिवहन के बाद ये सेब भारत के प्रमुख शहरों के बाजारों तक पहुंच जाते हैं।

अन्य फलों की स्थिति

यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि बाजार में बिकने वाले सभी फल महीनों पुराने होते हैं। सेब और कुछ चुनिंदा फलों के अलावा अधिकांश फल जैसे केला, पपीता, तरबूज, खरबूजा, अंगूर, लीची और आम को महीनों तक कोल्ड स्टोरेज में रखना नामुमकिन है। यदि इन्हें पेड़ से तोड़ने के बाद एक या दो सप्ताह से ज्यादा रखा जाए, तो ये सड़ने लगते हैं। अधिकांश फल पेड़ से टूटने के बाद 3 से 10 दिनों के भीतर आप तक पहुंच जाते हैं। हालांकि कुछ फल जैसे कीवी, अनार, संतरा और नाशपाती को 2 से 6 महीने तक कोल्ड स्टोरेज में रखा जा सकता है, लेकिन इनकी भी अपनी सीमाएं होती हैं।

सेब के पेड़ का जीवन चक्र

सेब की पैदावार प्रकृति के एक अनुशासित चक्र पर निर्भर करती है। इसके मुख्य चरणों को इस प्रकार समझा जा सकता है:

  • सुप्तावस्था (दिसंबर से फरवरी): सर्दियों के महीनों में पेड़ पूरी तरह पत्ती-विहीन हो जाता है। इसे चिलिंग ऑवर्स की आवश्यकता होती है ताकि यह अगली फसल के लिए रिचार्ज हो सके।
  • फूलों का आना (मार्च से अप्रैल): वसंत ऋतु के आगमन पर पेड़ पर सफेद और हल्के गुलाबी फूल खिलते हैं। मधुमक्खियां इस दौरान परागण की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • विकास चरण (मई से जुलाई): परागण के बाद फूल फल का रूप लेने लगते हैं। इस दौरान पानी और धूप पाकर सेब तेजी से बढ़ते हैं।
  • तुड़ाई (अगस्त से अक्टूबर): फूल आने के करीब 120 से 150 दिनों बाद सेब पककर तैयार हो जाते हैं। अगस्त से अक्टूबर के बीच किसान इन्हें तोड़कर बाजार या कोल्ड स्टोरेज में भेजते हैं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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