भारत
2 घंटे पहले
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समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा रक्षा समझौता
हिंद महासागर में भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपये के एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदे को मंजूरी दी है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों के लिए अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और मिसाइल लॉन्चरों की खरीद करना है। यह कदम न केवल नौसेना की मारक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि सरकार के आत्मनिर्भर रक्षा मिशन को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा।
समझौते का विवरण और आत्मनिर्भरता
यह समझौता 6 अक्टूबर को संपन्न हुआ है, जिसमें ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 661.50 करोड़ रुपये का करार किया गया है। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह पूरी खरीद प्रक्रिया भारतीय खरीद, भारतीय रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित श्रेणी के अंतर्गत पूरी की गई है। इस दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह भी उपस्थित थे। इस पूरी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल घरेलू रक्षा निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSME को भी इस बड़ी परियोजना से जुड़ने का बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा।
रोजगार और तकनीक का संगम
इस रक्षा सौदे से न केवल नौसेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि आने वाले तीन वर्षों में देश के भीतर रोजगार के कई नए अवसर भी पैदा होंगे। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय सैन्य क्षमता के आधुनिकीकरण के रूप में देख रहे हैं। इस पहल से रक्षा उपकरणों के उत्पादन में घरेलू उद्योगों की बढ़ती भूमिका को और मजबूती मिलेगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि रक्षा तकनीक के मामले में अब भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, जिससे भविष्य की चुनौतियों का सामना करना आसान होगा।
ब्रह्मोस की ताकत से लैस होंगे जंगी जहाज
ब्रह्मोस प्रणाली पहले से ही भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों पर तैनात है और यह सतह से सतह पर मार करने वाला एक बेहद घातक प्रक्षेपास्त्र तंत्र है। अपनी अत्यधिक तेज गति और सटीक निशाना लगाने की क्षमता के लिए विश्वभर में जानी जाने वाली यह मिसाइल, समुद्र में भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा हथियार है। नई तकनीक के आने से नौसेना के जंगी जहाजों को अपनी आक्रामक स्थिति को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह प्रणाली लंबी दूरी से समुद्री और जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को पलक झपकते ही तबाह करने की क्षमता रखती है। इस समझौते के बाद, हिंद महासागर में भारत का सुरक्षा घेरा और अधिक मजबूत होगा, जिससे किसी भी संभावित दुश्मन के लिए भारतीय सीमाओं के भीतर चुनौती खड़ी करना लगभग नामुमकिन होगा। यह निवेश महज उपकरणों की खरीद नहीं है, बल्कि यह भविष्य की समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी सैन्य शक्ति के निर्माण का एक बड़ा संकल्प है।
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