दिल्ली
3 घंटे पहले
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एसीपी विवेक भगत को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाल ही में विवादों में घिरे एसीपी विवेक भगत को अब एडिशनल डीसीपी का कार्यभार नहीं दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोमवार को जारी किए गए अपने आदेश में अब संशोधन किया जा रहा है। गौरतलब है कि विवेक भगत पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस स्थिति के बीच भगत को प्रमोट कर एडिशनल डीसीपी का चार्ज देने का आदेश सामने आया था, जिसके बाद पुलिस विभाग और सरकार पर सवाल उठने लगे थे।
स्वयं किया कार्यभार न लेने का अनुरोध
इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देते हुए यह बताया गया है कि एसीपी विवेक भगत ने खुद यह अनुरोध किया है कि जब तक उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच पूरी नहीं हो जाती और उसका कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक वे यह अतिरिक्त जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे। भगत के इस स्वेच्छिक अनुरोध को देखते हुए ही सरकार ने अपने पुराने आदेश में बदलाव करने का निर्णय लिया है।
क्या था 5 अक्टूबर का सरकारी आदेश
दिल्ली सरकार ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर दी गई जानकारी में बताया कि 5 अक्टूबर को दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा यानी DANIPS के कुल 12 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का पदभार सौंपने का आदेश जारी किया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार देने की पूरी प्रक्रिया 25 अगस्त को ही शुरू कर दी गई थी, जो कि हालिया विवाद से काफी पहले की प्रशासनिक कार्रवाई थी। सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद ही 5 अक्टूबर को यह आदेश जारी हुआ था, इसलिए इसे हालिया घटनाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय स्थिति
सरकार की ओर से दी गई सफाई में यह भी साफ किया गया है कि एडिशनल डीसीपी का यह वर्तमान कार्यभार केवल एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों को किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय लाभ प्राप्त नहीं होता है। साथ ही, ये अधिकारी नियमित रूप से नियुक्त एडिशनल डीसीपी के वैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों का उपयोग करने के लिए अधिकृत नहीं होते हैं। बहरहाल, भगत की मांग का सम्मान करते हुए सरकार अब 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन कर रही है और शेष 11 अधिकारियों के लिए दोबारा सूची जारी की जाएगी।
क्राइम ब्रांच कर रही है आरोपों की गहन जांच
यह पूरा विवाद शनिवार को जंतर-मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। इस दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि उन्हें इस संबंध में कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन शिकायतों को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। प्रदर्शन के समय वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी हुई थी, जिसके बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने संसद मार्ग थाने के बाहर इकट्ठा होकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन भी किया था।
मूल आदेश में किन अधिकारियों के नाम थे शामिल
दिल्ली सरकार द्वारा 5 अक्टूबर को जारी किए गए मूल आदेश में एसीपी विवेक भगत के अलावा अन्य 11 अधिकारियों को एडिशनल डीसीपी का कार्यभार सौंपा गया था। इन अधिकारियों में डॉ. विकास श्योकंद, ए वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता के नाम शामिल थे। अब संशोधित आदेश के तहत विवेक भगत का नाम हटा दिया गया है और बाकी बचे 11 अधिकारियों के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इस मामले में जांच की प्रगति और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई अन्य जानकारी साझा नहीं की गई है।
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