बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौज के छूटे पसीने, हथियार थामे मैदान में उतरीं बलूच शेरनियां, KAAD ब्रिगेड ने मचाया कोहराम विश्व 4 घंटे पहले 10
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अपनी पहली महिला लड़ाकू यूनिट 'करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन' (KAAD) का गठन किया है, जिसने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ हिंसक हमलों और हाईवे नाकेबंदी की घटनाओं को अंजाम देकर सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौज के छूटे पसीने, महिला लड़ाकों ने संभाला मोर्चा

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और वहां सक्रिय विद्रोही गुटों ने अब पाकिस्तानी सेना की नाक में दम कर रखा है। बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तानी सेना के बीच दशकों से चल रही इस जंग में अब एक ऐसा मोड़ आया है जिसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक खलबली मचा दी है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अब सीधे मोर्चे पर अपनी महिला लड़ाकों की एक बेहद आक्रामक और पूरी तरह से प्रशिक्षित ब्रिगेड उतारने का दावा किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में इन महिला लड़ाकों को भारी हथियारों के साथ रणनीतिक ठिकानों पर तैनात और हाईवे पर गाड़ियों को रोकते हुए देखा जा सकता है। इस नए घटनाक्रम ने शहबाज सरकार और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।

'करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन' (KAAD) का नया मोर्चा

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उन्होंने अपने सशस्त्र ढांचे में महिलाओं को व्यवस्थित रूप से शामिल करने के लिए एक विशेष इकाई का गठन किया है। इस विंग को करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन (KAAD) नाम दिया गया है। इस सैन्य दस्ते का नाम प्रसिद्ध बलूच कार्यकर्ता और बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन-आजाद की पूर्व अध्यक्ष करीमा बलोच के नाम पर रखा गया है, जिन्हें बलूच राष्ट्रवाद और प्रतिरोध का एक बड़ा प्रतीक माना जाता है।

संगठन द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि ये महिलाएं केवल प्रतीकात्मक रूप से हथियार नहीं थामे हुए हैं, बल्कि उन्हें कठिन पहाड़ी इलाकों में सैन्य प्रशिक्षण लेते, रणनीतिक योजनाएं बनाते और कमांडिंग पोजीशन संभालते हुए दिखाया गया है। एक महिला कमांडर जैसी दिखने वाली विद्रोही दूसरी महिलाओं को आदेश देती और ऑपरेशन को लीड करती नजर आ रही है। हालांकि, इन दावों और वीडियो की किसी स्वतंत्र संस्था द्वारा पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसने बलूचिस्तान में पहले से ही नाजुक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।

केवल मोर्चे पर लड़ाई नहीं, खुफिया और लॉजिस्टिक्स में भी माहिर

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के अनुसार, इस महिला इकाई का काम केवल बंदूकें चलाना या सीधी लड़ाई लड़ना नहीं है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को देखते हुए इन्हें बहुमुखी भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है। संगठन के दावों के अनुसार, ये महिला लड़ाके निम्नलिखित महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं:

  • रणनीतिक खुफिया जानकारी: पाकिस्तानी सैन्य काफिलों की गतिविधियों और चौकियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाना।
  • सुरक्षित संचार प्रणाली: पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में विद्रोहियों के बीच गुप्त संदेशों और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना।
  • चिकित्सा और रसद सहायता: घायल बलूच विद्रोहियों को तत्काल प्राथमिक उपचार देना और युद्ध के मैदान में भोजन व आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

इस ब्रिगेड ने हाल ही में बलूचिस्तान में हुई बड़ी हिंसक गतिविधियों की जिम्मेदारी भी ली है। संगठन के अनुसार, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजना के तहत बने हाईवे पर तुरबत के पास जुसाक नामक स्थान पर पाकिस्तानी सेना के एक काफिले पर किया गया हमला KAAD की पहली बड़ी सशस्त्र कार्रवाई थी। इसके अलावा, संगठन ने दो अन्य सैन्य अभियानों में कम से कम 9 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने का बड़ा दावा किया है।

कलात से चागाई तक बलूच लड़ाकों का भारी बवाल

इन महिला लड़ाकों की बढ़ती सक्रियता का दायरा बलूचिस्तान के विभिन्न संवेदनशील जिलों तक फैल चुका है। कलात के मंगुचर इलाके में भी इस महिला यूनिट द्वारा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर तलाशी और नाकेबंदी अभियान चलाया गया। इस दौरान उन्होंने कई संदिग्ध सैन्य वाहनों को रोका और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया।

दूसरी तरफ, चागाई जिले से आई खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हथियारबंद विद्रोहियों का एक बड़ा समूह, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, याकमच नामक इलाके में दाखिल हुआ। वहां उन्होंने बलूचिस्तान को पड़ोसी देशों से जोड़ने वाले अति-महत्वपूर्ण क्वेटा-तफ्तान हाईवे को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया और वाहनों की सघन तलाशी ली। इस घटना के दौरान लड़ाकों ने याकमच में स्थित पाकिस्तान के राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (NADRA) के एक कार्यालय पर धावा बोलकर उसे पूरी तरह से आग के हवाले कर दिया।

क्वेटा-तफ्तान हाईवे पर सुरक्षा का बड़ा संकट

क्वेटा-तफ्तान मार्ग पाकिस्तान के लिए व्यापारिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन यह लंबे समय से विद्रोही हमलों का केंद्र बना हुआ है। इस साल भी बलूच हथियारबंद समूहों द्वारा इस रास्ते पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने और सरकारी वाहनों को आग लगाने की कई वारदातें दर्ज की गई हैं। अब इस अशांत क्षेत्र में महिला लड़ाकों की सीधी पैठ ने पाकिस्तानी खुफिया तंत्र की कमजोरी को उजागर कर दिया है।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि विद्रोहियों द्वारा जारी किए गए इन प्रचार वीडियो को पूरी तरह से उनकी वास्तविक सैन्य क्षमता का पैमाना नहीं माना जा सकता, लेकिन बलूचिस्तान में महिलाओं का इस तरह हथियार उठाना इस बात का साफ संकेत है कि वहां की स्थानीय आबादी में असंतोष किस कदर बढ़ चुका है। अब देखना यह होगा कि इस नई और गंभीर चुनौती से निपटने के लिए पाकिस्तानी सेना और प्रशासन आने वाले दिनों में क्या रणनीति अपनाता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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