मध्य प्रदेश
3 घंटे पहले
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हाथी की ताकत का अंदाज़ा उसके विशाल शरीर को देखकर ही लगाया जा सकता है। यह जानवर स्वभाव से पूरी तरह शाकाहारी होता है और पौधे, झाड़ियां तथा फल खाकर ही अपना पेट भरता है। लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन में बरसों से बाबा महाकाल की सेवा में लगे एक हाथी की खुराक बाकी हाथियों से अलग है। इसी खास हाथी श्यामू की दिनचर्या और भोजन की चर्चा आज हम कर रहे हैं।
राजा के रूप में पूजे जाते हैं महाकाल
उज्जैन में भगवान महाकाल को राजा के रूप में पूजा जाता है और रोज़ाना लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन करने पहुंचते हैं। साल में सावन-भादो के अलावा कुछ ऐसे मौके आते हैं जब अवंतिका के राजा भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। जिस तरह किसी राजा के स्वागत में नगरवासी पलक-पांवड़े बिछा देते हैं, ठीक उसी तरह बाबा की सवारी के दौरान भक्त आतिशबाजी, रंगोली, फलाहार और फूलों की वर्षा सहित अनेक तरीकों से उनका स्वागत करते हैं।
बाबा महाकाल की सवारी में भक्तों के साथ कई ऐसे सेवक भी शामिल रहते हैं जो अपनी अलग छटा के कारण आकर्षण का केंद्र बनते हैं। इनमें घोड़े, बैल और हाथी सुंदर वस्त्र धारण किए हुए मुख्य रूप से नज़र आते हैं। इस बार भी सवारी भव्य रूप से निकलने वाली है, जिसके लिए इन जानवरों की डाइट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कम उम्र में ही बाबा की सेवा से जुड़े महावत
महावत सरमन गिरी बताते हैं कि वे बचपन से ही बाबा महाकाल की सवारी में सेवा देते आ रहे हैं। उनके मुताबिक, सबसे पहले उनके पास रामू नाम का हाथी था, जिसकी उम्र 70 वर्ष थी। रामू ने 1980 से लेकर 2016 तक बाबा की सेवा की। रामू की मृत्यु के बाद उन्होंने श्यामू को सवारी में शामिल किया।
श्यामू का जन्म 08.11.1997 को असम में हुआ था और 10 साल की उम्र में उसे असम से उज्जैन लाया गया। इस समय श्यामू की उम्र 29 वर्ष है और वह बीते 9 साल से लगातार बाबा की सवारी में सेवा दे रहा है।
बाबा के सेवक श्यामू की खास डाइट
महावत सरमन गिरी कहते हैं कि श्यामू उनके बेटे जैसा है। उसकी सेवा में रोज़ाना उनके परिवार के 10 महावत लगे रहते हैं। श्यामू सुबह 5 बजे जाग जाता है। इसके बाद 5.30 बजे से उसे नहलाना शुरू किया जाता है, जो करीब 7 बजे तक चलता है। फिर घर पर ही उसे 1 कुंटल सब्ज़ियां खिलाई जाती हैं।
इसके बाद शहर के प्रमुख मार्गों से होकर वह करीब 8 बजे महाकाल पहुंचता है, जहां उसे दोबारा 1 कुंटल भोजन कराया जाता है। दिनभर श्रद्धालु उसे अलग-अलग तरह का भोजन, सब्ज़ी और फल खिलाते हैं। शाम करीब 8 बजे वह वापस घर लौटता है।
घर लौटने के बाद श्यामू को 25 किलो आटे से बनी ताज़ा 50 मोटी रोटियां खिलाई जाती हैं। कुछ देर बाद उसे डेढ़ किलो आटा मिलाकर सानी (सुखला) दी जाती है, फिर 50 किलो गन्ना खिलाया जाता है। इसके बाद उसे हरा लचका घास दिया जाता है। पानी की बात करें तो श्यामू एक बार में 25 बाल्टी पानी पी जाता है। उसकी देखभाल में सुबह से शाम तक 10 महावत जुटे रहते हैं।
उज्जैन वासी लुटाते हैं प्यार
महावत बताते हैं कि श्यामू जैसे ही घर से बाहर निकलता है, लोग बड़े उत्साह से उसे दुलारते हैं। कई बच्चे रोज़ाना उसका इंतज़ार करते हैं और उसे रोटियां तथा फल खिलाते हैं। कई लोग बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए हाथी को प्रणाम करते हैं और उसके बाद ही अपने दिन की शुरुआत करते हैं।
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