सिर्फ 1 सेंटीमीटर के चांदी के तिरंगे में दिखी भारत की अनेकता में एकता, डॉक्टर इकबाल सक्का ने ओम, अल्लाह, खंडा और क्रॉस से दिया सांप्रदायिक सौहार्द का अनोखा संदेश राजस्थान 2 घंटे पहले 3
उदयपुर के अंतरराष्ट्रीय शिल्पी डॉक्टर इकबाल सक्का ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सिर्फ 1 ग्राम चांदी और तांबे से 1 सेंटीमीटर का अनोखा तिरंगा बनाया है, जिसमें चार प्रमुख धर्मों के प्रतीक उकेरे गए हैं।

राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर हमेशा से अपनी समृद्ध संस्कृति और बेजोड़ कला के लिए दुनिया भर में मशहूर रही है। इसी ऐतिहासिक शहर के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय शिल्पी और प्रोफेसर डॉक्टर इकबाल सक्का ने स्वतंत्रता दिवस के गौरवमयी अवसर पर अपनी कला का एक ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। अपनी सूक्ष्म कला के लिए पहचाने जाने वाले डॉक्टर सक्का ने इस बार देश प्रेम और कौमी एकता को प्रदर्शित करने के लिए एक बेहद अनोखा तिरंगा झंडा तैयार किया है। इस राष्ट्रीय ध्वज की लंबाई और चौड़ाई महज 1 सेंटीमीटर है। हालांकि, यह तिरंगा आकार में जितना छोटा है, इसका संदेश उतना ही विशाल और गहरा है। इस बेहद सूक्ष्म कलाकृति के माध्यम से उन्होंने न केवल देश की एकता बल्कि विश्व शांति का भी एक मजबूत संदेश दिया है।

सूक्ष्म कलाकृति में समाया अखंड भारत का संदेश

डॉक्टर इकबाल सक्का द्वारा तैयार किया गया यह अनूठा तिरंगा इतना छोटा है कि इसे सामान्य आंखों से पूरी तरह देख पाना और इसकी बारीकियों को समझ पाना लगभग नामुमकिन है। इसे ठीक से देखने और समझने के लिए विशेष रूप से लेंस की सहायता लेनी पड़ती है। इस अत्यंत सूक्ष्म कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता इसके भीतर छिपे धार्मिक और राष्ट्रीय प्रतीक हैं। डॉक्टर सक्का ने इस तिरंगे पर राई के दाने से भी छोटे आकार में हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक ओम, इस्लाम के अल्लाह, सिख धर्म के खंडा और ईसाई धर्म के क्रॉस को बड़ी ही खूबसूरती और बारीकी के साथ उकेरा है। इन चारों धर्मों के पवित्र प्रतीकों को तिरंगे के साथ एक ही सूत्र में पिरोकर उन्होंने भारत की उस प्राचीन विरासत को दुनिया के सामने रखा है, जो विविधता में एकता की बात करती है।

कड़ी मेहनत और सूक्ष्म कारीगरी का बेजोड़ नमूना

इस चमत्कारी कलाकृति को बनाने के पीछे डॉक्टर सक्का की लगन और कठिन परिश्रम की एक लंबी कहानी है। इस बेहद छोटे और बारीक तिरंगे झंडे को तैयार करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित सामग्रियों और समय का उपयोग किया है:

  • लगभग 1 ग्राम चांदी का इस्तेमाल किया गया है।
  • करीब 1 gram तांबे का प्रयोग आधार और फिनिशिंग के लिए किया गया है।
  • इस पूरी कलाकृति को अंतिम रूप देने में उन्हें लगभग 36 घंटे का लंबा समय लगा।

इतनी सूक्ष्म धातु पर चार अलग-अलग धर्मों के प्रतीकों को इतनी सफाई से काटना और उन्हें राष्ट्रीय ध्वज के रूप में ढालना कोई आसान काम नहीं था। डॉक्टर सक्का को इस दौरान बेहद एकाग्रता के साथ काम करना पड़ा। अत्यंत छोटे आकार और बेजोड़ हस्तशिल्प कौशल के कारण यह कलाकृति न केवल शिल्प कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है, बल्कि कला प्रेमियों के बीच भी उत्सुकता का विषय बनी हुई है।

विश्व शांति और कौमी एकता ही असली ताकत: डॉक्टर सक्का

इस कलाकृति के निर्माण के उद्देश्य पर बात करते हुए प्रोफेसर डॉक्टर इकबाल सक्का ने बड़े ही भावुक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान और इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती यहां विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोगों का आपस में मिलजुलकर रहना है। हमारे देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सदियों से एक साथ प्रेमपूर्वक रहते आए हैं और ये सभी मिलकर ही हमारे अखंड भारत का निर्माण करते हैं।

डॉक्टर सक्का का मानना है कि उनकी यह कलाकृति इसी आपसी भाईचारे और सौहार्द का जीवंत प्रतीक है। उनका कहना है कि जिस तरह भारत में विभिन्न विचारधाराओं और आस्थाओं के लोग एक साथ मिलकर तिरंगे की आन-बान और शान के लिए खड़े रहते हैं, ठीक उसी तरह पूरी दुनिया में भी युद्ध और अशांति के माहौल को खत्म कर शांति, अहिंसा और आपसी सद्भाव की स्थापना की जानी चाहिए।

राजस्थान उच्च न्यायालय को भेंट करने की अनूठी इच्छा

इस अमूल्य और ऐतिहासिक धरोहर जैसी कलाकृति को सहेजने के लिए डॉक्टर सक्का ने एक विशेष योजना बनाई है। उनकी दिली इच्छा है कि स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर तैयार की गई इस अनमोल कृति को राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर को ससम्मान भेंट किया जाए। अपनी इस इच्छा को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने बकायदा राजस्थान उच्च न्यायालय प्रशासन को एक आधिकारिक पत्र भी लिखा है और उनसे संपर्क साधा है। डॉक्टर सक्का का कहना है कि यह केवल धातु का एक टुकड़ा या महज एक छोटा सा झंडा नहीं है, बल्कि यह देश के संविधान, न्याय, समरसता और अखंडता का एक विराट संदेश है। इसलिए वे चाहते हैं कि इस राष्ट्रीय और सामाजिक संदेश देने वाली कलाकृति को न्याय के मंदिर में उचित स्थान प्राप्त हो।

सामाजिक और राष्ट्रीय संदेश का माध्यम रही है डॉक्टर सक्का की कला

यह पहला मौका नहीं है जब डॉक्टर इकबाल सक्का ने अपनी जादुई उंगलियों से ऐसी किसी अद्भुत कृति का निर्माण किया हो। इससे पहले भी वे देश और दुनिया के अलग-अलग ज्वलंत विषयों, सामाजिक कुरीतियों और राष्ट्रीय गौरव के मुद्दों पर कई बेहद बारीक और विचारोत्तेजक सूक्ष्म कलाकृतियां बनाकर देश-विदेश में अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। उनकी कला हमेशा से ही समाज को एक सकारात्मक दिशा देने और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाने का सशक्त माध्यम रही है। इस बार स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को कौमी एकता का यह नायाब तोहफा देकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक कलाकार अपनी कला के जरिए समाज में कितना बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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