राजस्थान
5 घंटे पहले
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डीएपी की कमी का समाधान
कृषि के मौजूदा सीजन में डीएपी यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट की बढ़ती मांग और कई इलाकों में इसकी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, कृषि विभाग ने इस स्थिति से निपटने के लिए किसानों को राहत भरी सलाह दी है। विभाग का कहना है कि यदि बाजार में डीएपी उपलब्ध नहीं है, तो किसान परेशान न हों। इसके बजाय एसएसपी यानी सिंगल सुपर फॉस्फेट और यूरिया के संतुलित मिश्रण का उपयोग करके अपनी फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति आसानी से कर सकते हैं। यह विकल्प न केवल जेब पर हल्का पड़ेगा, बल्कि मिट्टी की सेहत के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
एसएसपी खाद की खासियत
कृषि विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक बी.डी. शर्मा के अनुसार, सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) एक प्रमुख फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है जो डीएपी के एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में काम करता है। इस खाद में लगभग 16 प्रतिशत फॉस्फोरस और 11 प्रतिशत सल्फर की मात्रा पाई जाती है। सल्फर की उपस्थिति के कारण, यह खाद विशेष रूप से दलहनी और तिलहनी फसलों की पैदावार बढ़ाने में बहुत प्रभावी है। फसलों के विकास और बेहतर गुणवत्ता के लिए पौधों को फॉस्फोरस के साथ सल्फर की भी बहुत आवश्यकता होती है, जो इस खाद के माध्यम से आसानी से मिल जाती है।
लागत में बचत और पोषण प्रबंधन
एक सामान्य डीएपी बैग की बात करें तो उसमें लगभग 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नत्रजन उपलब्ध होता है। यदि किसान इन तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए डीएपी के साथ अलग से सल्फर खरीदते हैं, तो उनका खर्च काफी बढ़ जाता है। इसके विपरीत, एसएसपी और यूरिया का सही मात्रा में संयोजन करने से कम लागत में ही पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। बाजार में एसएसपी की उपलब्धता भी अधिक सुलभ है, जिससे समय पर बुवाई और खाद डालने का काम बाधित नहीं होता है।
विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में खाद न मिलने पर घबराने के बजाय किसानों को तकनीकी विकल्पों को अपनाना चाहिए। खाद का इस्तेमाल करते समय यह ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इसकी मात्रा खेत की उर्वरता और फसल की आवश्यकता के अनुसार हो। सभी किसानों को सलाह दी जाती है कि वे उर्वरकों के प्रयोग से पहले अपने क्षेत्र के नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें और मिट्टी की स्थिति के आधार पर ही खाद की मात्रा तय करें। बिना सही परामर्श के खाद का गलत अनुपात नुकसानदेह भी हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह लेना समझदारी है।
किसान कैसे प्राप्त करें अधिक जानकारी
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद के सही उपयोग और उसकी उपलब्धता के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए किसान अपने निकटतम कृषि कार्यालय में जा सकते हैं। इसके अलावा, करौली जिले और आसपास के किसान किसी भी प्रकार की सहायता या तकनीकी जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 18001801551 पर फोन कर सकते हैं। यह हेल्पलाइन नंबर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है। इस तरह से डीएपी के संकट के दौरान एसएसपी और यूरिया का सही इस्तेमाल किसानों की फसल को सुरक्षित रखने और उत्पादन बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।
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