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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान में फिर लौट आए लॉकडाउन जैसे हालात
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और रेड सी में पैदा हुई समुद्री व्यापारिक रुकावटों का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहराता जा रहा है। देश में ईंधन की किल्लत और आर्थिक संकट को देखते हुए शहबाज सरकार ने देश में एक बार फिर लॉकडाउन जैसी सख्ती लागू कर दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और सरकारी खजाने पर पड़ रहे अनावश्यक बोझ को रोकना है। इसके लिए कैबिनेट डिवीजन ने एक विस्तृत नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके तहत सरकारी गाड़ियों की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है और ईंधन आवंटन में 50% की भारी कटौती की गई है।
शादियों में अब सिर्फ एक डिश परोसा जाएगा
पाकिस्तान सरकार के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची पर नकेल कसने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अब किसी भी शादी समारोह में मेहमानों को केवल एक ही डिश परोसा जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों में होने वाली अत्यधिक बर्बादी पर रोक लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा, शादी हॉल, टेंट हाउस और अन्य व्यावसायिक आयोजनों के लिए भी समय सीमा तय कर दी गई है, जिन्हें रात 10 बजे तक हर हाल में बंद करना होगा।
बाजार और दुकानों के खुलने का नया समय
देश भर के व्यापारियों और दुकानदारों के लिए सरकार ने सख्त समय सीमा तय की है। अब से दुकानों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और ग्रोसरी दुकानों को रात 9 बजे तक ही खोलने की अनुमति होगी। हालांकि, रेस्टोरेंट, कैफे और खाने-पीने के अन्य फूड आउटलेट्स को रात 11 बजे तक चलने की छूट दी गई है। राहत की बात यह है कि टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इन समय प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है।
किसे मिली है छूट और कौन रहेगा दायरे में
सरकार ने इस नोटिफिकेशन में कुछ आवश्यक सेवाओं को समय सीमा के प्रतिबंधों से मुक्त रखा है ताकि आम जनता को ज्यादा परेशानी न हो। इन छूट प्राप्त सेवाओं में अस्पताल, फार्मेसी, क्लिनिक, मेडिकल लैब, फ्यूल स्टेशन, सीएनजी स्टेशन, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, जिम, खेल सुविधाएं, सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT कंपनियां और कॉल सेंटर शामिल हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि आवश्यक सेवाओं पर असर न पड़े लेकिन गैर-जरूरी आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित किया जाए।
सरकारी खर्चों पर कड़ा प्रहार
इस्लामाबाद द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में सरकारी खर्चों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है। सरकार ने नई गाड़ियों की खरीद पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े उपकरणों की खरीद को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम किसी भी विकास परियोजना पर लागू नहीं होंगे। सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर बाकी सभी मीटिंग्स टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही करें। साथ ही, अब सरकारी स्तर पर आयोजित होने वाले सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस के लिए बाहरी स्थानों पर पैसा खर्च करने के बजाय सरकारी ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
विदेशी दौरों और ऑफिशियल डिनर पर रोक
अगले तीन महीनों के लिए मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूर्ण विराम लगा दिया गया है। जिन मामलों में विदेश यात्रा अत्यंत आवश्यक होगी, वहां केवल इकोनॉमी क्लास में यात्रा की अनुमति मिलेगी। सरकार ने आधिकारिक डिनर और सेमिनार पर भी रोक लगा दी है, सिवाय उन कार्यक्रमों के जिनमें विदेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल हों। इसके अतिरिक्त, सरकारी विभागों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे कर्मचारियों के वेतन संबंधी खर्चों को छोड़कर बाकी सभी नॉन-ईआरई खर्चों में हर महीने 5% की कटौती सुनिश्चित करें।
ईंधन आवंटन में कटौती के नियम
सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन के कोटे में 50% की कटौती का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, सेना, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, सिविल आर्म्ड फोर्सेज और फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की ऑपरेशनल गाड़ियों को इस कटौती से छूट दी गई है। यह नियम केवल इन संगठनों के एडमिनिस्ट्रेटिव और नॉन-ऑपरेशनल विभागों के लिए प्रभावी होगा। यह कदम ईंधन आयात बिल को कम करने की सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
पिछले निर्णयों का प्रभाव और वर्तमान स्थिति
पाकिस्तान में इससे पहले भी मार्च महीने में इसी तरह के मितव्ययिता उपाय लागू किए गए थे। हालांकि, बाद में उनमें से कुछ पाबंदियां हटा दी गई थीं, लेकिन बाजारों के समय पर लगी पाबंदियां बनी रहीं। अब एक बार फिर सरकार ने ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। जानकारों का कहना है कि रेड सी में बढ़ते तनाव की वजह से आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाएं पाकिस्तान जैसे देशों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रही हैं। तीन महीने के लिए लागू किए गए ये नियम फिलहाल पूरे देश में लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिससे आम जीवन और व्यापारिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ना तय है।
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