संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ अमेरिकी योजना नाकाम, रूस-चीन की वीटो से बढ़ा संकट विश्व 2 घंटे पहले 6
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान पर निगरानी रखने वाले पैनल के कार्यकाल को बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश रूस और चीन के वीटो के कारण विफल हो गई है। इसी बीच, एक नई रिपोर्ट में ईरान के अंदर अमेरिकी सैन्य हमलों को युद्ध अपराध के दायरे में रखा गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका को बड़ा झटका

ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की अमेरिका की महत्वाकांक्षी योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में करारा झटका लगा है। अमेरिका ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल के कार्यकाल को एक और वर्ष के लिए बढ़ाना था। हालांकि, सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों रूस और चीन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ अपने वीटो का इस्तेमाल किया, जिसके चलते यह कोशिश सिरे नहीं चढ़ सकी। मतदान के दौरान कुल 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में अपना मत दिया, जबकि पाकिस्तान समेत दो अन्य देशों ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। रूस और चीन के कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।

निगरानी पैनल का भविष्य और सुरक्षा परिषद का समीकरण

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कुल 15 सदस्यों वाली एक महत्वपूर्ण इकाई है। यद्यपि प्रस्ताव को बहुमत का समर्थन प्राप्त था, लेकिन सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार होता है, जिसका उपयोग करके रूस और चीन ने इस पूरे तंत्र पर ताला जड़ दिया। यह विशेष पैनल ईरान से जुड़ी सैन्य तकनीकों के अवैध हस्तांतरण, प्रतिबंधों के उल्लंघन और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों की जांच करके सुरक्षा परिषद को अपनी रिपोर्ट सौंपता था। अब इस पैनल के कार्यकाल के साथ ही इसकी भूमिका भी समाप्त हो जाएगी, जिससे ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी रखने वाला एक प्रमुख माध्यम हमेशा के लिए खत्म हो गया है।

अमेरिका और रूस-चीन के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी

अमेरिका का तर्क था कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में निगरानी तंत्र को भंग करना प्रतिबंधों के अनुपालन को कमजोर करेगा। पश्चिमी देशों के राजनयिकों ने इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। इसके विपरीत, रूस और चीन ने इस निगरानी व्यवस्था को राजनीतिक हथियार करार दिया। बीजिंग और मॉस्को का यह मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई और कड़ी निगरानी से कूटनीतिक समाधान नहीं निकलते, बल्कि यह प्रक्रिया समस्या को सुलझाने के बजाय उसे और जटिल बनाती है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पश्चिमी शक्तियों और रूस-चीन के बीच की गहरी कूटनीतिक खाई को स्पष्ट कर दिया है। ईरान के लिए यह एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है, क्योंकि वह लंबे समय से इन निगरानी तंत्रों को अपने देश की संप्रभुता के खिलाफ बताता रहा है।

अमेरिका पर लगे युद्ध अपराध के गंभीर आरोप

एक तरफ जहां अमेरिका ईरान पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद एक बड़ी मुसीबत में फंस गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की एक ताज़ा रिपोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों को 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में रखने के लिए ठोस आधार बताए गए हैं। इन हमलों में 150 से अधिक निर्दोष नागरिकों की जान गई है, जिनमें से 120 तो केवल मासूम बच्चे थे। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि के लिए एक बड़ा झटका है।

हमलों का विवरण और मानवीय त्रासदी

जांच मिशन की रिपोर्ट में दो प्रमुख सैन्य हमलों का विस्तार से वर्णन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाया गया था। इस हमले में अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों का उपयोग किया गया था। स्थानीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वीभत्स हमले में 156 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिसमें 120 बच्चे शामिल थे। विशेषज्ञों ने अपनी जांच में पाया कि स्कूल की पहचान स्पष्ट थी और इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला कि उक्त भवन का सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा रहा था।

इसके अतिरिक्त, लामेर्द में स्थित एक खेल परिसर और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों पर किए गए दूसरे हमले में कम से कम 21 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें 7 बच्चे बताए गए हैं। अमेरिका ने इन हमलों में अपनी किसी भी भूमिका से आधिकारिक तौर पर इनकार किया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान पर भी मानवाधिकार हनन के आरोप

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की रिपोर्ट में केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ईरान के सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान हुए प्रदर्शनों के समय सुरक्षा बलों की कार्रवाई मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकती है। इस अवधि के दौरान 221 बच्चे मारे गए और हजारों लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया। संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिका और ईरान, दोनों ही पक्षों से आह्वान किया है कि वे तुरंत इन उल्लंघनों को रोकें, पीड़ितों को उचित मुआवजा दें और स्वतंत्र जांच का रास्ता साफ करें। यह रिपोर्ट भविष्य में दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को और अधिक बढ़ने का संकेत दे रही है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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