तनाव को काबू में रखना है तो बदलें खान-पान की ये 3 गलत आदतें, बिगड़ सकता है कोर्टिसोल का संतुलन स्वास्थ्य एक दिन पहले 10
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तनाव से घिरे रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी खाने-पीने की कुछ गलत आदतें इसे और बढ़ा सकती हैं। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने उन 3 प्रमुख आदतों के बारे में बताया है जो शरीर के तनाव हार्मोन यानी कोर्टिसोल को प्रभावित करती हैं।

तनाव और खान-पान का गहरा संबंध

मौजूदा समय में तनाव आधुनिक जीवन का एक हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता और ऑफिस की भागदौड़ के बीच लोग अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। इस दौरान लोग घंटों सोशल मीडिया और फोन पर बिताते हैं, जो मानसिक शांति को कम करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सीधा असर हमारे शरीर में मौजूद कोर्टिसोल हार्मोन पर पड़ता है। कोर्टिसोल को तनाव हार्मोन के रूप में जाना जाता है और यदि इसका स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो यह नींद, पाचन, ऊर्जा और हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने उन 3 सामान्य आदतों की ओर इशारा किया है जिन्हें लोग अक्सर सही समझ लेते हैं, लेकिन ये शरीर के लिए तनाव से निपटना कठिन बना देती हैं।

तनाव बढ़ा सकती हैं ये 3 आदतें

1. गलत तरीके से लो-कार्ब डाइट लेना: आजकल कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट का चलन काफी बढ़ा है। हालांकि, समस्या तब होती है जब लोग बिस्कुट या पैकेटबंद अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड छोड़ने के बजाय पारंपरिक आहार जैसे रोटी, दाल, चावल, पोहा, उपमा, इडली और डोसा जैसी चीजों को डाइट से बाहर कर देते हैं। यह असंतुलित आहार हमारे शरीर में GABA नामक न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को कम कर सकता है, जो तनाव को नियंत्रित करने में मदद करता है।

2. नाश्ता छोड़ना: सुबह की जल्दबाजी में अक्सर लोग नाश्ता स्किप कर देते हैं और केवल चाय या कॉफी का सहारा लेते हैं। बायोलॉजिकल क्लॉक के अनुसार, सुबह के समय कोर्टिसोल का स्तर स्वाभाविक रूप से अधिक होता है। नाश्ता न करने से यह चक्र बाधित हो जाता है, जिससे तनाव का स्तर दिन भर असामान्य बना रह सकता है। कैफीन पर निर्भर रहने के बजाय सुबह कुछ पौष्टिक खाना बेहतर होता है।

3. मौसमी फलों से दूरी: कई लोग शुगर की चिंता में आम और केले जैसे मौसमी फलों को खाना पूरी तरह बंद कर देते हैं। रुजुता दिवेकर के मुताबिक, यह एक भूल है। मौसमी फल प्रीबायोटिक्स से भरपूर होते हैं, जो पाचन और आंतों के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखते हैं। साथ ही, इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल त्वचा और बालों की सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं, जो तनाव की स्थिति में प्रभावित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

तनाव कम करने और कोर्टिसोल को संतुलित रखने का अर्थ खाना छोड़ना या कठोर डाइटिंग करना नहीं है, बल्कि सही और संतुलित भोजन का चुनाव करना है। हेल्दी जीवनशैली और सही आहार अपनाकर ही शरीर के आंतरिक संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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