क्या आग लगने पर इलेक्ट्रॉनिक दरवाजे जानलेवा बन जाते हैं? जानें पूरी सच्चाई भारत एक घंटा पहले 2
लखनऊ समेत देश के कई शहरों में आग लगने की घटनाओं के दौरान इलेक्ट्रॉनिक दरवाजों के लॉक हो जाने से लोगों की जान फंसी है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और खराब इंस्टॉलेशन ही इन डिजिटल तालों को खतरनाक बनाता है।

इलेक्ट्रॉनिक दरवाजों के लॉक होने का सच

हाल के दिनों में लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग के दौरान इलेक्ट्रॉनिक दरवाजों के अचानक लॉक हो जाने की घटना ने सबको हैरान कर दिया है। आग और धुएं के बीच बच्चे कमरों में फंस गए थे, जिसके बाद डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि जनवरी में दिल्ली, मार्च में इंदौर और मई-जून में दिल्ली की विभिन्न आगजनी की घटनाओं में भी इलेक्ट्रॉनिक तालों के जाम होने के कारण दर्जनों लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

क्यों खतरनाक साबित होते हैं ये दरवाजे

आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डोर को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए कि फायर अलार्म बजते ही या बिजली गुल होने की स्थिति में वह तुरंत अनलॉक हो जाए। हालांकि, भारत में अक्सर इन मानकों का पालन नहीं किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निम्नलिखित कारणों से ये दरवाजे आपातकाल में मौत का जाल बन सकते हैं:

  • सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले सुरक्षा सिस्टम का उपयोग।
  • नियमित रखरखाव और टेस्टिंग का अभाव।
  • फायर सेफ्टी नियमों का कमजोर तरीके से लागू होना।
  • इमारत में मौजूद लोगों को आपातकालीन निकास प्रक्रिया की जानकारी न होना।

इलेक्ट्रॉनिक लॉक कैसे काम करता है

एक डिजिटल लॉक मुख्य रूप से तीन भागों से मिलकर बना होता है जो एक इलेक्ट्रॉनिक दरबान की तरह काम करता है:

1. सेंसर या रीडर: यह ताले की आंख और कान है, जो फिंगरप्रिंट, पासवर्ड या कार्ड के जरिए आपकी पहचान की पुष्टि करता है।

2. कंट्रोल यूनिट: यह ताले का दिमाग है, जो सेंसर से मिली जानकारी को अपनी मेमोरी में मौजूद डेटा से मिलाता है और निर्णय लेता है।

3. लॉकिंग मैकेनिज्म: यह ताले का हाथ है, जो बिजली के करंट के जरिए मैग्नेट या मोटर का उपयोग कर कुंडी को खोलता या बंद करता है।

सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है

दुनिया भर के प्रमुख एयरपोर्ट्स, अस्पतालों और ऑफिसों में इलेक्ट्रॉनिक दरवाजे सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वहां कड़े मानकों का पालन होता है। एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक डोर सिस्टम में अनिवार्य रूप से निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए:

  • अंदर से बिना किसी चाबी के खुलने की मैनुअल सुविधा (इमरजेंसी रिलीज)।
  • फायर अलार्म सिस्टम से जुड़ाव ताकि आग लगते ही दरवाजे खुद अनलॉक हो जाएं।
  • सिस्टम फेल होने की स्थिति में बैटरी बैकअप की व्यवस्था।
  • नियमित मॉक ड्रिल और आपातकालीन निकास के रास्तों की स्पष्ट मार्किंग।

डिजिटल लॉक तकनीक आधुनिक जीवन का हिस्सा है, लेकिन इनकी स्थापना के समय सुरक्षा से समझौता करना किसी भी इमारत में रहने वालों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी स्थान पर जाने के बाद वहां के आपातकालीन निकास और मैनुअल रिलीज बटन की जानकारी रखना हमेशा समझदारी भरा होता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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